OMG! इंदौर में रिटायर्ड प्रोफेसर के साथ बड़ा साइबर फ्रॉड, 33 लाख की ठगी – पुलिस भी रह गई हैरान!

OMG! इंदौर में रिटायर्ड प्रोफेसर के साथ बड़ा साइबर फ्रॉड, 33 लाख की ठगी – पुलिस भी रह गई हैरान!
इंदौर। ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड प्रोफेसर को शिकार बना लिया। ठगों ने खुद को साइबर क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर प्रोफेसर से 33 लाख रुपये ठग लिए। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी के चलते 26.45 लाख रुपये रिकवर कर लिए गए। इंदौर में रिटायर्ड प्रोफेसर के साथ बड़ा साइबर फ्रॉड
कैसे दिया गया ठगी को अंजाम?
? वीडियो कॉल के जरिए ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया।
? उन्होंने आधार कार्ड को मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल बैंक खातों से जुड़ा बताकर गिरफ्तारी की धमकी दी।
? बुजुर्ग प्रोफेसर को मानसिक दबाव में डालकर डराया और बैंक खातों में 33 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
➡️ ठगी का पता चलते ही प्रोफेसर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद कार्रवाई शुरू हुई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, रिकवर हुए 26.45 लाख रुपये
? अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश डांडोतिया के अनुसार,
✅ 49 बैंक खातों को ब्लॉक किया गया।
✅ तेजी से कार्रवाई कर 26.45 लाख रुपये वापस मंगवाए गए।
✅ इस रकम से प्रोफेसर ने पुणे में अपना लीवर ट्रांसप्लांट करवाया।
✅ बाकी बचे पैसों की रिकवरी के लिए जांच जारी है।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट‘ स्कैम?
? ‘डिजिटल अरेस्ट‘ एक नई तरह की ऑनलाइन ठगी है, जिसमें
✔️ ठग खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताते हैं।
✔️ लोगों को फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
✔️ वीडियो या ऑडियो कॉल के जरिए दबाव बनाया जाता है।
➡️ पुलिस की अपील: किसी भी संदिग्ध कॉल या वीडियो कॉल आने पर सतर्क रहें और तुरंत पुलिस को सूचना दें।
कैसे बचें साइबर ठगी से?
✅ अचानक आए पुलिस या बैंक से जुड़े कॉल्स पर विश्वास न करें।
✅ कोई भी बैंक अधिकारी या पुलिस पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती।
✅ शिकायत करने के लिए तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
✅ ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए साइबर जागरूकता बढ़ाएं।
? क्या आपके साथ भी ऐसा कोई फर्जी कॉल आया है? अपनी राय कमेंट में बताएं और इस खबर को शेयर करें ताकि और लोग सतर्क रह सकें! ⬇️



















