
Mahasamund Property Tax Row: महासमुंद की ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर (Property Tax) को लेकर विवाद। ग्रामीणों का आरोप- मनमाना टैक्स वसूला जा रहा है और राशन बंद करने की धमकी दी जा रही है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Mahasamund Property Tax Row: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में इन दिनों ‘संपत्ति कर’ (Property Tax) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Chhattisgarh Panchayat Raj Act, 1993 की धारा 77 के तहत वसूला जाने वाला यह टैक्स अब ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बन गया है। आरोप है कि पंचायतों में टैक्स के नाम पर ‘मनमानी वसूली’ (Arbitrary Collection) की जा रही है।
आइए जानते हैं कि आखिर क्यों महासमुंद के ग्रामीण आक्रोशित हैं और क्या है यह पूरा विवाद।
1. धारा 77: अनिवार्य कर या मनमाना अभियान? (The Controversy)
Mahasamund Property Tax Row: नियमों के मुताबिक, ग्राम पंचायतों को संपत्ति कर वसूलने का अधिकार है। लेकिन महासमुंद के ग्रामीण इलाकों से शिकायतें आ रही हैं कि कर निर्धारण (Tax Assessment) में कोई पारदर्शिता (Transparency) नहीं है।
Arbitrary Billing: ग्रामीणों का आरोप है कि एक ही गांव में अलग-अलग घरों को 3,000 से 4,000 रुपये तक का भारी-भरकम बिल थमाया जा रहा है।
Economic Burden: गरीब परिवारों के लिए इतनी बड़ी राशि एकमुश्त (Lump sum) जमा करना नामुमकिन जैसा है।
2. ‘टैक्स नहीं तो राशन नहीं’ – धमकी से ग्रामीणों में गुस्सा
Mahasamund Property Tax Row: इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ पंचायत प्रतिनिधियों पर ग्रामीणों को डराने-धमकाने के आरोप लग रहे हैं।
ग्रामीणों का दावा है: “हमें चेतावनी दी जा रही है कि अगर हमने संपत्ति कर जमा नहीं किया, तो राशन दुकान (PDS Shop) से मिलने वाला सरकारी अनाज बंद कर दिया जाएगा।”
इस तरह की धमकियों ने ग्रामीणों के बीच भय और आक्रोश (Fear and Outrage) पैदा कर दिया है। सरकारी सुविधाओं को टैक्स से जोड़ना प्रशासनिक दुरुपयोग (Administrative Misuse) की श्रेणी में आता है।
3. सरपंच और सचिव की कार्यशैली पर उठे सवाल
Mahasamund Property Tax Row: विशेषज्ञों (Experts) का मानना है कि टैक्स वसूलना पंचायतों का कानूनी अधिकार है, लेकिन इसकी एक तय प्रक्रिया (Standard Procedure) होती है। मनमाने ढंग से बिल बनाना और आवश्यक सेवाओं (Essential Services) को रोकने की धमकी देना पूरी तरह अवैध है। महासमुंद के कई गांवों में सरपंच और सचिव की कार्यशैली अब जांच के घेरे में है।
4. कलेक्टर से शिकायत की तैयारी (Villagers’ Next Move)
Mahasamund Property Tax Row: अब यह विवाद शांत होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है। परेशान ग्रामीण अब सामूहिक रूप से District Collector से शिकायत करने की योजना बना रहे हैं। उनकी मांग है कि:
टैक्स का निर्धारण पारदर्शी तरीके से हो।
गरीब परिवारों को राहत दी जाए।
राशन बंद करने जैसी धमकियां देने वालों पर कार्रवाई हो।
क्या कहता है नियम?
Mahasamund Property Tax Row: Chhattisgarh Panchayat Raj Act के तहत पंचायतों को विकास कार्यों के लिए फंड जुटाने हेतु टैक्स लगाने का हक है। लेकिन इसमें ‘Financial Capacity’ और ‘Fair Assessment’ का ध्यान रखना अनिवार्य है। क्या महासमुंद प्रशासन इस मामले में दखल देगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
क्या आपके गांव में भी संपत्ति कर के नाम पर मनमानी हो रही है? हमें कमेंट में बताएं और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि प्रशासन तक यह बात पहुंचे!



















