खल्लारी मंदिर रोपवे हादसा: मौत का तांडव, 2 श्रद्धालुओं ने गंवाई जान; मेंटेनेंस कंपनी पर गिरी गाज, FIR दर्ज

खल्लारी मंदिर रोपवे हादसा:छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सुप्रसिद्ध खल्लारी माता मंदिर में हुए दर्दनाक रोपवे हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस भीषण दुर्घटना में मौतों की संख्या अब बढ़कर दो हो गई है। मंगलवार की रात वेंटिलेटर पर जीवन की जंग लड़ रहे 47 वर्षीय किसान गोविंद स्वामी ने दम तोड़ दिया। इससे पहले, हादसे के दिन ही रायपुर की एक शिक्षिका की जान चली गई थी।
नवरात्रि के पावन पर्व पर मातम: कैसे हुई यह अनहोनी?
खल्लारी मंदिर रोपवे हादसा:यह हृदयविदारक घटना चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन (रविवार) सुबह हुई। श्रद्धालु माता के दर्शन कर रोपवे ट्रॉली के जरिए नीचे उतर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ:
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केबल का टूटना: अचानक रोपवे का मुख्य केबल टूट गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
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खाई में गिरी ट्रॉली: केबल टूटने से एक ट्रॉली अनियंत्रित होकर करीब 20 फीट नीचे पथरीली खाई और चट्टानों से जा टकराई।
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भीषण टक्कर: नीचे से ऊपर जा रही दूसरी ट्रॉली भी इस झटके की चपेट में आकर असंतुलित हो गई। इस पूरी घटना में कुल 16 श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए थे।
हादसे के शिकार: उजड़ गए हंसते-खेलते परिवार
खल्लारी मंदिर रोपवे हादसा:इस लापरवाही ने दो परिवारों को ताउम्र का दर्द दे दिया है:
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आयुषी धावरे (28): रायपुर निवासी आयुषी पाटन के आत्मानंद स्कूल में शिक्षिका थीं। उनकी शादी को अभी महज 4 महीने ही हुए थे। हादसे में उनके पति और देवर भी घायल हैं, जिनका इलाज जारी है।
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गोविंद स्वामी (47): महासमुंद निवासी गोविंद के निधन के बाद अब उनकी पत्नी नमिता और 10 वर्षीय मासूम बेटी अंशमिता की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है।
प्रशासन का कड़ा रुख: मेंटेनेंस कंपनी और कर्मचारियों पर FIR
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने रोपवे के रखरखाव (Maintenance) में भारी कोताही के आरोप लगाए हैं। जिला प्रशासन की जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्पष्ट होने पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है:
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आरोपियों के नाम: कोलकाता की संचालक कंपनी ‘रोप वे एवं रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ सहित स्थानीय कर्मचारी बीरबल जंघेल और रामेश्वर यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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कानूनी धाराएं: खल्लारी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 173, 289 और 125(a) के तहत एफआईआर दर्ज की है।
खल्लारी माता मंदिर का धार्मिक महत्व
खल्लारी मंदिर रोपवे हादसा:महासमुंद से लगभग 25 किमी दूर ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर आस्था का केंद्र है। पहाड़ी की चोटी तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को 800 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों की सुविधा के लिए यहाँ रोपवे संचालित किया जा रहा था। महाभारत कालीन इतिहास और भीम के पदचिह्नों वाली इस पावन स्थली पर नवरात्रि में भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन इस हादसे ने उत्सव की खुशियों को मातम में बदल दिया है।
खल्लारी रोपवे हादसा प्रबंधन की बड़ी लापरवाही का परिणाम है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ इस तरह का खिलवाड़ अक्षम्य है। उम्मीद है कि प्रशासन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेगा ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।









