
मुंगेली: स्वतंत्रता दिवस पर वसूली का आरोप, CEO और पूर्व DPRO की शिकायतमुंगेली जिला पंचायत CEO और पूर्व DPRO पर स्वतंत्रता दिवस के नाम पर वसूली के आरोप। मुख्यमंत्री से ACB/EOW जांच और ऑडिट की मांग की गई है।
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पत्रकारों को सौजन्य भेंट देने और मिठाई बांटने के नाम पर शासकीय विभागों से अवैध रूप से लाखों रुपये जुटाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय और सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई है।

शिकायत में मुंगेली जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) गोकुल रावटे और तत्कालीन जिला जनसंपर्क अधिकारी (DPRO) सुजीत सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) या आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से जांच की मांग की गई है।
हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामला शुरुआती जांच व शिकायतों के दौर में है। जिला प्रशासन की ओर से विस्तृत रिपोर्ट और आधिकारिक बयान आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

क्या है मुंगेली का पूरा मामला?
शिकायतकर्ता पत्रकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत (पोर्टल संदर्भ संख्या: WP260900176043) के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम का हवाला देकर जिले के विभिन्न सरकारी विभागों से धनराशि एकत्र की गई। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों के पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर अलग-अलग विभागों पर आर्थिक दबाव बनाया गया।
शिकायत में कहा गया है कि एकत्र की गई राशि का उपयोग किसी भी शासकीय प्रक्रिया या पत्रकारों के कल्याण में नहीं किया गया। इसके बजाय, यह राशि बिना किसी आधिकारिक पारदर्शी लेखा-जोखा के व्यक्तिगत समन्वय के आधार पर हस्तांतरित की गई।

32 से 35 लाख रुपये जुटाने का गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता का दावा है कि जिले के प्रत्येक शासकीय विभाग और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDOs) से कथित तौर पर 50 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का योगदान मांगा गया।
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कथित कुल राशि: शिकायत के मुताबिक विभिन्न विभागों से कुल 32 से 35 लाख रुपये एकत्रित किए जाने का अनुमान है।
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भूमिका पर सवाल: आरोप है कि जिला पंचायत CEO ने अपने प्रभाव का उपयोग किया और यह राशि तत्कालीन सहायक संचालक व DPRO को सौंपी गई।
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लेखा-जोखा का अभाव: शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इस लेन-देन का कोई शासकीय रिकॉर्ड या वाउचर प्रस्तुत नहीं किया गया है।
ACB, EOW जांच और ऑडिट की प्रमुख मांगें
मामले को लेकर मुख्यमंत्री से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया गया है। शिकायतकर्ता ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदु प्रस्तुत किए हैं:
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एजेंसी जांच: मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ACB या EOW से जांच कराई जाए।
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गुप्त वित्तीय ऑडिट: मुंगेली जिले के सभी DDOs (आहरण एवं संवितरण अधिकारियों) के बैंक खातों का गुप्त वित्तीय ऑडिट हो।
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साक्ष्यों की सुरक्षा: लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों और शासकीय अभिलेखों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
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अधिकारियों पर कार्रवाई: निष्पक्ष जांच प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
आरोपों पर जिला पंचायत CEO की सफाई
जब इस मामले में जिला पंचायत CEO गोकुल रावटे से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने अवैध वसूली में अपनी सीधी संलिप्तता से साफ इनकार किया।
CEO का कहना है कि उन्होंने किसी भी विभाग के लिए कोई राशि तय नहीं की थी। उनके अनुसार, “वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर केवल कुछ विभागों से सहयोग करने की बात कही गई थी। किसी निश्चित राशि की मांग नहीं की गई थी और इसकी पूरी जिम्मेदारी जनसंपर्क विभाग की थी।”
इस बयान के बाद प्रशासनिक गलियारों में मामले की अलग-अलग व्याख्याएं की जा रही हैं। वहीं, मामले से जुड़े तत्कालीन जिला कलेक्टर कुन्दन कुमार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, किंतु उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका आधिकारिक वक्तव्य सामने आने पर उसे भी संदर्भ में शामिल किया जाएगा।
आगे क्या होगा और किस पर पड़ेगा असर?
शिकायत दर्ज होने के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभागों में हड़कंप का माहौल है। यदि मुख्यमंत्री कार्यालय से इस मामले में जांच के आदेश जारी होते हैं, तो मुंगेली जिले के कई विभागीय अधिकारियों से पूछताछ हो सकती है। फिलहाल, प्रशासनिक स्तर पर मामले की प्रारंभिक समीक्षा की प्रतीक्षा की जा रही है।









