छत्तीसगढ़ में बच्चों की हकलाहट: स्पीच थैरेपिस्ट की कमी से भटक रहे पालक

विश्व हकलाहट जागरूकता दिवस पर छत्तीसगढ़ की स्थिति: सरकारी अस्पतालों में सिर्फ आंबेडकर अस्पताल में स्पीच थैरेपी है, वहां भी लंबी वेटिंग से पालक परेशान।
छत्तीसगढ़ में बच्चों की हकलाहट के इलाज के लिए स्पीच थैरेपिस्ट की कमी पालकों के लिए बड़ी परेशानी बन रही है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में केवल रायपुर के आंबेडकर अस्पताल के ईएनटी विभाग में स्पीच थैरेपी की सुविधा है।

यहां भी बच्चों की लंबी वेटिंग है, जिससे इलाज की राह देख रहे पालकों में निराशा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हकलाहट कोई कमजोरी नहीं है।
विश्व हकलाहट जागरूकता दिवस 22 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसी मौके पर यह स्थिति एक बार फिर चर्चा में है।

सरकारी अस्पतालों में कैसी है सुविधा?
- प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्पीच थैरेपिस्ट उपलब्ध नहीं हैं
- केवल आंबेडकर अस्पताल के ईएनटी विभाग में स्पीच थैरेपी की सुविधा है
- वहां बच्चों की वेटिंग लंबी है
इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो बच्चे की बोलने की समस्या का इलाज कराना चाहते हैं। वेटिंग की सटीक अवधि और प्रदेश में थैरेपिस्ट के स्वीकृत पदों की संख्या की जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
हकलाहट के पीछे क्या है कारण?
आंबेडकर अस्पताल के ऑडियोलॉजिस्ट के अनुसार हकलाहट न डर से होती है, न डांट से। उनके मुताबिक इसका करीब 60 फीसदी कारण जेनेटिक और दिमाग के स्पीच प्रोसेसिंग तालमेल से जुड़ा है।

पालकों में अपराधबोध
ऑडियोलॉजिस्ट बताते हैं कि अस्पताल आने वाले रोज करीब 10 में से 7 पालक यही सवाल पूछते हैं कि कहीं उनकी वजह से तो ऐसा नहीं हुआ। कहीं ज्यादा डांटना या मोबाइल देखने देना तो कारण नहीं बना। विशेषज्ञों के मुताबिक पालकों का यह अपराधबोध सबसे भारी होता है।
एक परिवार का अनुभव
अमिता अपने 5 साल के बेटे अयांश का अनुभव साझा करती हैं। शुरुआत में जब अयांश ने “म-म-मम्मी” कहा, तो परिवार ने इसे प्यार में अटकना समझा और लोग हंस दिए।
लगभग 6 महीने बाद स्कूल में नाम पूछे जाने पर वह करीब 40 सेकंड तक “अ-अ-अ” पर अटका रहा और कक्षा में बच्चे हंस पड़े। इसके बाद अयांश ने स्कूल जाना बंद कर दिया। अमिता के अनुसार परेशानी हकलाहट से ज्यादा लोगों की प्रतिक्रिया की थी।
पालक क्या ध्यान रखें?
- हकलाहट को बच्चे की कमजोरी न समझें
- खुद को दोष देने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लें
- बच्चे की बात पर हंसने या टोकने से बचें
ये बातें विशेषज्ञों के कथन और घटना के संदर्भ पर आधारित सामान्य सावधानियां हैं। इलाज की विधि और अवधि हर बच्चे में अलग हो सकती है, जिसके लिए चिकित्सक से परामर्श जरूरी है।
आगे क्या?
सरकारी स्तर पर स्पीच थैरेपिस्ट की नियुक्ति या नए केंद्र शुरू करने की किसी योजना की जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। तब तक पालकों को आंबेडकर अस्पताल के ईएनटी विभाग से संपर्क करना पड़ रहा है।









