पुलिस कर्मियों को चाहिए सप्ताहिक अवकाश, योजना लागू होने में देरी से बढ़ा असंतोष

कोरबा/कटघोरा: छत्तीसगढ़ में पुलिस कर्मियों की अवकाश व्यवस्था को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। पुलिस विभाग में कार्यरत कर्मियों पर अनुशासन और तत्परता बनाए रखने की जिम्मेदारी है, लेकिन अत्यधिक दबाव और अवकाश की कमी उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। पुलिस कर्मियों को चाहिए सप्ताहिक अवकाश, योजना लागू होने में देरी से बढ़ा असंतोष
सरकार की घोषणा, लेकिन क्रियान्वयन अधूरा
सरकार ने पुलिस कर्मियों को सप्ताह में एक दिन का अवकाश देने की घोषणा की थी। इस पहल का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को परिवार और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करने का अवसर देना था। हालांकि, यह योजना अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हो सकी है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। पुलिस कर्मियों को चाहिए सप्ताहिक अवकाश, योजना लागू होने में देरी से बढ़ा असंतोष
आकस्मिक अवकाश का भी लाभ नहीं
पुलिस कर्मियों के लिए 16 दिनों का आकस्मिक अवकाश (CL) निर्धारित है, लेकिन व्यावहारिक परिस्थितियों के चलते वे इसका लाभ नहीं उठा पाते। लगातार काम करने की वजह से उनकी मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ती जा रही है। पुलिस कर्मियों को चाहिए सप्ताहिक अवकाश, योजना लागू होने में देरी से बढ़ा असंतोष
पुलिस कल्याण बोर्ड की सिफारिशें
पुलिस कल्याण बोर्ड ने भी समय-समय पर पुलिस कर्मियों के लिए बेहतर अवकाश नीति लागू करने के सुझाव दिए हैं। बोर्ड का मानना है कि अवकाश व्यवस्था में सुधार से पुलिस कर्मियों की कार्यक्षमता और मनोबल में वृद्धि होगी। पुलिस कर्मियों को चाहिए सप्ताहिक अवकाश, योजना लागू होने में देरी से बढ़ा असंतोष
अवकाश का महत्व
अन्य विभागों की तुलना में पुलिस कर्मियों की सेवा को “अत्यंत आवश्यक” श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, इन सेवाओं में कार्यरत कर्मियों का पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन प्रभावित हो रहा है। पुलिस कर्मियों के लिए सप्ताहिक अवकाश न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए, बल्कि उनके कार्य की गुणवत्ता के लिए भी आवश्यक है। पुलिस कर्मियों को चाहिए सप्ताहिक अवकाश, योजना लागू होने में देरी से बढ़ा असंतोष



















