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आदिवासी बच्चों के हक पर डाका! कोरबा में 3.83 करोड़ का घोटाला, जांच रिपोर्ट दबाई, पुलिस ने FIR से किया इनकार

कोरबा : आदिवासी बच्चों के हक पर डाका! कोरबा में 3.83 करोड़ का घोटाला, जांच रिपोर्ट दबाई, पुलिस ने FIR से किया इनकार, छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में आदिवासी विकास विभाग में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें आदिवासी बच्चों के लिए आए करोड़ों रुपये की बंदरबांट कर ली गई। आरोप है कि विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से 3 करोड़ 83 लाख 28 हजार रुपये की सरकारी राशि का गबन किया गया। हैरत की बात यह है कि इस हाई-प्रोफाइल घोटाले की जांच रिपोर्ट को कथित तौर पर दबा दिया गया है और सबूतों के अभाव में पुलिस ने भी FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

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यह मामला वित्तीय वर्ष 2021-22 का है, जब केंद्र सरकार ने आदिवासी बाहुल्य कोरबा जिले के छात्रावासों और आश्रमों की मरम्मत और जरूरी सामानों की खरीदी के लिए 6 करोड़ 62 लाख 29 हजार रुपये आवंटित किए थे। यह राशि महीनों तक विभाग में पड़ी रही, लेकिन वित्तीय वर्ष के अंत में इसे खर्च करने की हड़बड़ी दिखाई गई। आरोप है कि 31 मार्च 2023 को, यानी वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन, चेक के जरिए 2 करोड़ 90 लाख 95 हजार 904 रुपये निकालकर अलग-अलग ठेकेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।आदिवासी बच्चों के हक पर डाका! कोरबा में 3.83 करोड़ का घोटाला

अधिकारियों पर नरमी, ठेकेदारों पर फोड़ा ठीकरा

जब यह गड़बड़ी सामने आई, तो कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू हुई। विभाग ने अपनी आंतरिक जांच में घोटाले का सारा ठीकरा कुछ ठेकेदारों और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर पर फोड़ दिया है। हालांकि, तत्कालीन सहायक आयुक्त, सहायक अभियंता और उप अभियंता जैसे जिम्मेदार अधिकारियों की सीधी भूमिका को स्पष्ट करने के बजाय, विभाग ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि उनकी जांच के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। इस रवैये से सवाल उठ रहा है कि क्या बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है?आदिवासी बच्चों के हक पर डाका! कोरबा में 3.83 करोड़ का घोटाला

कहां गए घोटाले के सबूत? सारे दस्तावेज गायब

इस घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इससे जुड़े लगभग सभी मूल दस्तावेज कार्यालय से गायब हैं। विभाग के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि:

  • किन कामों के लिए ठेकेदारों को भुगतान किया गया?

  • टेंडर प्रक्रिया कब और कैसे अपनाई गई?

  • कामों की प्रशासकीय और तकनीकी स्वीकृति किसने दी?

  • चेकबुक, मेजरमेंट बुक और भुगतान से जुड़ी फाइलें कहां हैं?

दस्तावेजों के अभाव में यह पता लगाना लगभग नामुमकिन हो गया है कि जमीन पर कोई काम हुआ भी या नहीं, या सिर्फ कागजों पर करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।आदिवासी बच्चों के हक पर डाका! कोरबा में 3.83 करोड़ का घोटाला

पुलिस ने FIR करने से क्यों किया इनकार?

घोटाला उजागर होने के बाद, आदिवासी विकास विभाग ने सिविल लाइन थाने में केस दर्ज करने के लिए शिकायत तो दी, लेकिन मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट और जरूरी सबूत पुलिस को नहीं सौंपे। इस पर सिविल लाइन कोरबा के थानेदार प्रमोद डडसेना ने स्पष्ट किया कि “सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग की ओर से जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस कारण से FIR दर्ज नहीं हुई है।”आदिवासी बच्चों के हक पर डाका! कोरबा में 3.83 करोड़ का घोटाला

स्पष्ट है कि बिना सबूतों के पुलिस कार्रवाई नहीं कर सकती, और विभाग रिपोर्ट दबाकर बैठा है। इस bureaucratic दांव-पेंच में आदिवासी बच्चों के हक का पैसा लूटने वाले फिलहाल कानून की पकड़ से दूर हैं।आदिवासी बच्चों के हक पर डाका! कोरबा में 3.83 करोड़ का घोटाला

Dr. Tarachand Chandrakar

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