जेल में मौत पर ‘सियासी भूचाल’, बेटे ने शव लेने से किया इनकार; रातों-रात नप गईं जेलर मैडम!

अनुराग उपाध्याय/कांकेर:-
कांकेर/रायपुर। जेल में मौत पर ‘सियासी भूचाल’, बेटे ने शव लेने से किया इनकार; रातों-रात नप गईं जेलर मैडम! छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक आदिवासी ग्रामीण ‘जीवन ठाकुर’ की जेल में हुई मौत ने प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया है। मामला इतना गरमा गया कि मृतक के बेटे ने पिता का शव लेने से ही इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। सरकार ने डैमेज कंट्रोल करते हुए आनन-फानन में कांकेर जेल की जेलर को हटा दिया है, लेकिन सुलगते सवालों की आग अभी ठंडी नहीं हुई है।
जेलर पर गिरी गाज: कांकेर से सीधे जगदलपुर अटैच
जीवन ठाकुर की मौत और उसके बाद मचे घमासान के बीच जेल प्रशासन ने एक आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत कांकेर जेल की प्रभारी जेलर का तबादला तत्काल प्रभाव से जगदलपुर कर दिया गया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह कार्रवाई जनता और समाज के गुस्से को शांत करने के लिए “मरहम” की तरह की गई है। हालांकि, आदेश में प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया गया है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी जल्दबाजी में उन्हें हटाया क्यों गया? क्या जेलर की भूमिका संदिग्ध थी या यह सिर्फ आईवॉश है?जेल में मौत पर ‘सियासी भूचाल’, बेटे ने शव लेने से किया इनकार
वन अधिकार पट्टे का ‘खेल’ और ‘रसूखदारों’ की चुप्पी
पूरे मामले की जड़ ‘वन अधिकार पट्टे’ (फर्जी पट्टा कांड) से जुड़ी है। गोंडवाना समाज के संरक्षक और वरिष्ठ आदिवासी नेता विजय ठाकुर ने कलेक्ट्रेट में प्रशासन से तीखे सवाल किए हैं।जेल में मौत पर ‘सियासी भूचाल’, बेटे ने शव लेने से किया इनकार
बड़ा सवाल: जीवन ठाकुर और उनके परिवार को तो फर्जी पट्टे के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन इस खेल में शामिल अन्य “बड़े खिलाड़ी” अब तक आजाद क्यों हैं?
चाराम कनेक्शन: आरोपों के मुताबिक, चारामा के एक वरिष्ठ भाजपा नेता का नाम भी इस जमीन विवाद में उछल रहा है। समाज के लोगों ने कलेक्टर चेंबर में घंटों बहस की और पूछा कि रसूखदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
सड़क पर उतरा समाज, सियासत हुई ‘मौन’
प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई और जेल में हुई मौत के विरोध में चारामा में देर रात तक चक्काजाम रहा। गोंडवाना समाज ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। वहीं, पिछड़ा वर्ग समाज भी अब निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।जेल में मौत पर ‘सियासी भूचाल’, बेटे ने शव लेने से किया इनकार
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे संवेदनशील मुद्दे पर स्थानीय भाजपा नेता और बड़े राजनेता “मौन” साधे हुए हैं। जिस मामले में पूरे प्रदेश में शोर है, उस पर राजनीतिक दलों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।जेल में मौत पर ‘सियासी भूचाल’, बेटे ने शव लेने से किया इनकार
न्यायिक जांच से खुलेंगे राज?
फिलहाल, प्रशासन ने मामले की न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच (Judicial Inquiry) की बात कही है। लेकिन जनता का सवाल वही है—क्या जांच सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या उन सफेदपोशों तक भी पहुंचेगी जिनके इशारे पर फर्जी पट्टों का खेल चल रहा था?जेल में मौत पर ‘सियासी भूचाल’, बेटे ने शव लेने से किया इनकार
माहौल तनावपूर्ण है। एक तरफ बेटे का दर्द और समाज का गुस्सा है, तो दूसरी तरफ प्रशासन की लीपापोती की कोशिशें। देखना होगा कि जेलर के तबादले के बाद यह मामला शांत होता है या कोई नया मोड़ लेता है।जेल में मौत पर ‘सियासी भूचाल’, बेटे ने शव लेने से किया इनकार



















