एक्सीडेंट क्लेम में फर्जीवाड़ा: कोर्ट को गुमराह करने वाले 4 वकीलों की मुश्किलें बढ़ीं, जमानत याचिका खारिज

एक्सीडेंट क्लेम में फर्जीवाड़ा: छत्तीसगढ़ के न्यायिक गलियारे से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मोटर दुर्घटना दावा (Motor Accident Claim) प्रकरण में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और गलत शपथपत्र पेश करने के आरोपी चार अधिवक्ताओं को अदालत से बड़ा झटका लगा है। विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail) को सिरे से खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस मामले में आरोप है कि इन वकीलों ने मुआवजे के लालच में कोर्ट के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत किए:
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गलत पहचान: मृतक प्रभात कुजूर की पत्नी के रूप में ‘प्रेमिका कुजूर’ नामक महिला को पेश कर मुआवजा दावा किया गया।
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बयानों में खुलासा: जांच के दौरान खुद प्रेमिका कुजूर ने अदालत में पेश होकर स्पष्ट किया कि वह मृतक की पत्नी नहीं, बल्कि उसके भाई की पत्नी है।
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फर्जी हस्ताक्षर: महिला ने यह भी बताया कि उसने न तो किसी अधिवक्ता को अधिकृत किया और न ही किसी शपथपत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इसी तरह मिथिलता कुजूर नामक एक अन्य महिला ने भी अपने दस्तावेजों के दुरुपयोग की बात कही।
इन 4 वकीलों पर गिरेगी गाज
एक्सीडेंट क्लेम में फर्जीवाड़ा: जमानत याचिका खारिज होने वाले अधिवक्ताओं में निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
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एनपी चंद्रवंशी (62 वर्ष)
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भगवती कश्यप (50 वर्ष)
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शुभम चंद्रवंशी (32 वर्ष)
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सूरज वस्त्रकार (29 वर्ष)
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “कानून के जानकार ही बन गए गुनहगार”
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी वकील होने के नाते कानून के जानकार हैं, फिर भी उन्होंने जानबूझकर न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ किया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि यह मामला गंभीर प्रकृति का है और प्रथम दृष्टया आरोपियों को राहत देना उचित नहीं होगा। आदेश की प्रति संबंधित थाने को भेज दी गई है।
लगीं गंभीर धाराएं, 10 साल तक की हो सकती है सजा
एक्सीडेंट क्लेम में फर्जीवाड़ा: पुलिस ने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की कई गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है:
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धारा 233 और 246: झूठे साक्ष्य और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग के लिए (7 साल तक की सजा)।
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धारा 338: गंभीर हानि पहुंचाने के प्रयास में (10 साल तक की सजा का प्रावधान)।
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अन्य धाराएं: इसमें कोर्ट का अपमान (228), धोखाधड़ी (318) और सामूहिक अपराध (3-5) जैसी धाराएं भी शामिल हैं।
एक्सीडेंट क्लेम में फर्जीवाड़ा: अग्रिम जमानत निरस्त होने के बाद पुलिस अब किसी भी समय इन चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर सकती है। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों के पास निचली अदालत या हाई कोर्ट में नियमित जमानत (Regular Bail) के लिए आवेदन करने का ही विकल्प शेष रहेगा।









