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भिलाई

छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय आरक्षण पर उठे सवाल: सामाजिक कार्यकर्ता की आपत्ति

भिलाई के सामाजिक कार्यकर्ता अली हुसैन सिद्दीकी ने नगरीय निकाय आरक्षण प्रक्रिया पर उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अली हुसैन सिद्दीकी ने दो आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को भेजे पत्र में बताया कि आरक्षण प्रक्रिया में कई खामियां हैं जो नियमों के अनुरूप नहीं हैं। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय आरक्षण पर उठे सवाल: सामाजिक कार्यकर्ता की आपत्ति

पहली आपत्ति: अन्य पिछड़ा वर्ग जनसंख्या का गलत आधार

सिद्दीकी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का आरक्षण 2011 की जनगणना पर आधारित है, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 2024 की प्रस्तावित जनसंख्या (प्रोजेक्टेड पॉपुलेशन) को आधार बनाया गया है।

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  • प्रमुख बिंदु:
    1. 2011 में OBC की जनगणना नहीं हुई थी।
    2. 2024 का OBC सर्वे छत्तीसगढ़ राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग द्वारा अनुशंसित है।
    3. OBC का प्रतिशत निकालने के लिए 2011 और 2024 के डेटा की तुलना की गई है, जो नियमों के खिलाफ है।
    4. यह छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 11(क) और नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 29(ख) का उल्लंघन है।

सिद्दीकी ने मांग की है कि आरक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और इसे वास्तविक जनगणना के बाद पूरा किया जाए। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय आरक्षण पर उठे सवाल: सामाजिक कार्यकर्ता की आपत्ति

दूसरी आपत्ति: चिट प्रणाली का पालन नहीं

सिद्दीकी ने कहा कि पिछली बार रिसाली और रायगढ़ नगर निगमों में महापौर पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित था। इस बार दोनों नगर निगमों को अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।

  • नियमानुसार, इनमें से एक नगर निगम को महिला वर्ग के लिए चिट प्रणाली (लॉटरी पद्धति) से आरक्षित किया जाना था।
  • लेकिन ऐसा नहीं किया गया और सीधे रिसाली को अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया।

सिद्दीकी ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए उच्च न्यायालय का रुख करने की बात कही है। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय आरक्षण पर उठे सवाल: सामाजिक कार्यकर्ता की आपत्ति

आपत्ति का असर और सुझाव

सिद्दीकी ने संविधान और कानून का पालन करते हुए आरक्षण प्रक्रिया में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय आरक्षण पर उठे सवाल: सामाजिक कार्यकर्ता की आपत्ति

Nidar Chhattisgarh Desk

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