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रायपुर

Raipur Liquor News: शराब दुकानों में कम बिकी ‘अनजान’ ब्रांड्स की बोतलें, अब Salesmen की Salary से कटेगा 80 लाख का जुर्माना!

Raipur News Today: Raipur Liquor News: शराब दुकानों में कम बिकी ‘अनजान’ ब्रांड्स की बोतलें, अब Salesmen की Salary से कटेगा 80 लाख का जुर्माना!, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शराब की बिक्री को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। Excise Department (आबकारी विभाग) ने एक प्राइवेट कंसल्टेंसी एजेंसी पर ₹80 लाख का भारी जुर्माना (Fine) लगाया है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी इस जुर्माने की भरपाई अपनी जेब से नहीं, बल्कि दुकानों में काम करने वाले Salesmen और Supervisors की सैलरी काटकर कर रही है।

आखिर क्यों लगा 80 लाख का जुर्माना?

Raipur Liquor News:मामला रायपुर की शराब दुकानों से जुड़ा है। आबकारी मुख्यालय ने VIS Consultancy Agency को लक्ष्य (Target) दिया था कि वे मार्केट में नए और Non-popular brands (गैर-चर्चित ब्रांड्स) की शराब की बिक्री बढ़ाएं।

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Raipur Liquor News:सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एजेंसी तय लक्ष्य के मुताबिक शराब नहीं बेच पाई। Target पूरा न होने के कारण विभाग ने कंपनी पर ₹80 लाख का जुर्माना ठोक दिया। अब इस घाटे को पूरा करने के लिए कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन पर कैंची चलाना शुरू कर दिया है।

“सैलरी कटवाओ या नौकरी छोड़ो” – कर्मचारियों का दर्द

Raipur Liquor News:रायपुर जिले में लगभग 77 विदेशी शराब दुकानें (English Liquor Shops) संचालित हैं। इनमें काम करने वाले 450 से ज्यादा सेल्समैन और 70 से अधिक सुपरवाइजर अब संकट में हैं।

  • Salary Cut: बताया जा रहा है कि नवंबर में ₹40 लाख और दिसंबर में ₹41 लाख से ज्यादा की कटौती की जा चुकी है।

  • Threat to Staff: कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें धमकी दी जा रही है—”अगर सैलरी कटौती मंजूर नहीं, तो नौकरी छोड़ दो।”

  • Income Impact: एक सेल्समैन की सैलरी करीब ₹25,000 और सुपरवाइजर की ₹36,000 है। इतनी बड़ी कटौती से उनके घरों का बजट बिगड़ गया है।

क्या है असली समस्या? (Supply vs Demand Issue)

Raipur Liquor News:ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले कर्मचारियों ने इस पूरी व्यवस्था पर बड़े सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि:

  1. Demand of Customers: ग्राहक सिर्फ उन ब्रांड्स की मांग करते हैं जिन्हें वे जानते हैं। अनजान ब्रांड्स को कोई खरीदना नहीं चाहता।

  2. Wrong Supply: सुपरवाइजर जिस ब्रांड की डिमांड लिस्ट भेजते हैं, एजेंसी उसका केवल 25% ही सप्लाई करती है। बाकी 75% स्टॉक ऐसे ब्रांड्स का भेज दिया जाता है जिनकी कोई मांग ही नहीं है।

  3. Low Sales: जब मनपसंद ब्रांड नहीं मिलता, तो ग्राहक बिना खरीदे लौट जाते हैं। ऐसे में बिक्री कम होना स्वाभाविक है, जिसमें सेल्समैन की कोई गलती नहीं है।

Google Discover के लिए खास जानकारी:

Raipur Liquor News:यह विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ जहां सरकार राजस्व (Revenue) बढ़ाने के लिए नए ब्रांड्स को प्रमोट करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत और सप्लाई चेन में भारी अंतर नजर आ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में दखल देना चाहिए ताकि गरीब कर्मचारियों का शोषण बंद हो सके।

Pooja Chandrakar

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