सारंगढ़: निलंबित कर्मचारी को नियमों के खिलाफ जॉइनिंग कराना पड़ा भारी, सेजेस प्राचार्य को DPI का कारण बताओ नोटिस

सारंगढ: छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में नियमों की अनदेखी और पद के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सेजेस (SEGES) प्राचार्य और तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एल.पी. पटेल के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया है।
निलंबित कर्मचारी को नियमों के खिलाफ जॉइनिंग कराना पड़ा भारी,प्राचार्य पटेल पर एक निलंबित कर्मचारी के साथ सांठगांठ करने और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने का गंभीर आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला? (प्रभारी डीईओ के दौरान बरती गई अनियमितता)
यह मामला उस समय का है जब एल.पी. पटेल जिले के प्रभारी डीईओ के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर काम किया।
निलंबित कर्मचारी को नियमों के खिलाफ जॉइनिंग कराना पड़ा भारी,मुख्य आरोप सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी सुनील कर्ष से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, संयुक्त संचालक (JD) शिक्षा संभाग बिलासपुर ने सुनील कर्ष (शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, टुण्ड्री) के खिलाफ निलंबन आदेश और आरोप पत्र जारी किया था। इसके बावजूद, तत्कालीन प्रभारी डीईओ एल.पी. पटेल ने वरिष्ठ कार्यालय की अनुमति के बिना ही कर्ष को वापस पुरानी शाला में कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दे दी।
DPI ने जताई कड़ी नाराजगी, नियमों की अवहेलना का आरोप
लोक शिक्षण संचालनालय ने जारी नोटिस में सिलसिलेवार ढंग से आरोपों का विवरण दिया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संयुक्त संचालक (JD) के निर्देशों की अवहेलना करना और अनुशासनहीनता को बढ़ावा देना विभाग की छवि को धूमिल करता है। निलंबित कर्मचारी को बिना सक्षम अनुमति के दोबारा ड्यूटी पर लेना वित्तीय और प्रशासनिक नियमों का सीधा उल्लंघन है।
7 दिनों के भीतर मांगा जवाब, एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी
निलंबित कर्मचारी को नियमों के खिलाफ जॉइनिंग कराना पड़ा भारी,डीपीआई ने प्राचार्य एल.पी. पटेल को अपना पक्ष रखने के लिए 7 दिनों की समय सीमा दी है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो इसे आरोपों की स्वीकारोक्ति माना जाएगा और उनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग में हड़कंप
निलंबित कर्मचारी को नियमों के खिलाफ जॉइनिंग कराना पड़ा भारी,इस कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोपों के बीच अब सबकी नजरें प्राचार्य के जवाब पर टिकी हैं। यह मामला राज्य में प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही और नियमों के पालन पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा करता है।



















