सुशासन तिहार में लगे गंभीर आरोप, 60 साल पुराने कब्जे को वन विभाग ने नकारा, रिश्वत मांगने का भी दावा, कलेक्टर से न्याय की गुहार

सुशासन तिहार में लगे गंभीर आरोप, 60 साल पुराने कब्जे को वन विभाग ने नकारा, रिश्वत मांगने का भी दावा, कलेक्टर से न्याय की गुहार
सूरजपुर/रामानुजनगर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में ‘सुशासन तिहार’ के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। एक पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि वे जिस वन भूमि पर पिछले 60 वर्षों से काबिज होकर खेती कर रहे हैं, वन विभाग न केवल उनके कब्जे को मानने से इनकार कर रहा है, बल्कि जमीन के कागजात बनाने के एवज में रिश्वत की भी मांग कर रहा है। इस मामले ने ‘कौन सही, कौन गलत’ का एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।सुशासन तिहार में लगे गंभीर आरोप
1. सुशासन तिहार में पीड़ा: 60 साल का कब्जा, फिर भी बेदखली का डर?
सूरजपुर जिले के रामानुजनगर तहसील के ग्राम नकना निवासी युवध सिंह ने अपनी दादी सुखमनिया सिंह की ओर से सुशासन तिहार 2025 में एक आवेदन (क्रमांक-25143282700010) प्रस्तुत किया। युवध का दावा है कि उनके दादा स्वर्गीय हृदय लाल सिंह पिछले 60 वर्षों से ग्राम नकना में स्थित वन भूमि पर खेती करते आ रहे थे। उनके निधन के बाद, उनकी दादी सुखमनिया सिंह लगभग 4-5 एकड़ जमीन पर अपना कब्जा और खेती जारी रखे हुए हैं। इसी जमीन पर उनका मकान, बाड़ी और कोठार भी स्थित है। सुखमनिया सिंह एक अनपढ़ आदिवासी महिला हैं और अधिकारों की जानकारी के अभाव में उनके पास कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं बन सका है।सुशासन तिहार में लगे गंभीर आरोप
2. वन विभाग का दावा: कब्जा नहीं, अतिक्रमण हटाने का प्रयास
सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदन पर वन परिक्षेत्र अधिकारी, रामानुजनगर ने निराकरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि विभाग द्वारा स्थलीय जांच की गई है, जिसमें जनप्रतिनिधि और पंच भी मौजूद थे। जांच में पाया गया कि कुछ अज्ञात व्यक्ति वन भूमि पर कब्जे के इरादे से बेशरम की झाड़ियों की कटाई और सफाई कर रहे थे, जिस पर वन रक्षक द्वारा पहले ही नियंत्रण कर लिया गया था। विभाग का कहना है कि उक्त स्थान पर मनरेगा योजना के तहत कंटूर ट्रेंच की खुदाई भी कराई जा चुकी है और वहां किसी भी प्रकार का जोत-कोड (खेती) नहीं किया गया है, बल्कि जंगल की अवैध कटाई पाई गई है। भविष्य में वन अपराध करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।सुशासन तिहार में लगे गंभीर आरोप
3. पीड़ित का पलटवार: गलत निराकरण और भ्रष्टाचार के आरोप
वन विभाग के इस निराकरण से असंतुष्ट पीड़ित युवध सिंह ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कलेक्टर सूरजपुर को पुनः शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि विभाग द्वारा मामले का निराकरण गलत तरीके से किया गया है और प्रस्तुत जानकारी भी भ्रामक है। युवध का कहना है कि वन विभाग ने गलत स्थान की रिपोर्ट अपलोड कर मामले को निपटाने का प्रयास किया है, जो सुशासन तिहार की मूल भावना और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का मखौल उड़ाने जैसा है। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में 12 तस्वीरें और अन्य साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं, जो सुखमनिया सिंह के कब्जे वाली जमीन को दर्शाते हैं।सुशासन तिहार में लगे गंभीर आरोप
4. आदिवासी अधिकारों का हनन: स्थानीय कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल
युवध सिंह ने अपनी शिकायत में स्थानीय स्तर पर कार्यरत वन विभाग के कर्मचारियों, विशेषकर बिट गार्ड कृपा शंकर पांडे, को जांच प्रक्रिया से हटाने की मांग की है। उनका आरोप है कि स्थानीय कर्मचारियों की मिलीभगत और उदासीनता के कारण आदिवासी परिवारों के वन भूमि अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में जब सुखमनिया सिंह को वन भूमि पर खेती करने के लिए जुर्माना भरने हेतु वन विभाग, रामानुजनगर बुलाया गया, तो अधिकारियों ने पहले पैसे जमा करने को कहा। जब युवध ने लिखित रसीद और जुर्माने की राशि का विवरण मांगा, तो अधिकारियों ने कथित तौर पर गुस्से में रसीद देने से इनकार कर दिया, जिसे युवध ने भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण बताया।सुशासन तिहार में लगे गंभीर आरोप
5. कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग
युवध सिंह ने सूरजपुर कलेक्टर से इस पूरे मामले की किसी बाहरी और निष्पक्ष अधिकारी द्वारा पुनः जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने मांग की है कि जांच प्रक्रिया में उन्हें और अन्य प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए तथा जांच की तारीख की पूर्व सूचना दी जाए। उनकी प्रमुख मांग है कि उनकी दादी सुखमनिया सिंह को उनके वन भूमि अधिकारों के तहत वन अधिकार पत्रक, पट्टा और कब्जानामा प्रदान किया जाए ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवनयापन कर सकें।सुशासन तिहार में लगे गंभीर आरोप
यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि कैसे जमीनी स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी आदिवासी और कमजोर वर्गों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।सुशासन तिहार में लगे गंभीर आरोप



















