सिर्री मनरेगा मामले में सरपंच की बर्खास्तगी और FIR की मांग

धमतरी की ग्राम पंचायत सिर्री में मनरेगा कार्य में अनियमितता पर शास्ति लगी। युवा कांग्रेस के योगेन्द्र देवांगन ने सरपंच पर धारा 40 में कार्रवाई और FIR मांगी।
धमतरी जिले की ग्राम पंचायत सिर्री में मनरेगा के तहत हुए तालाब नवीनीकरण कार्य में कथित गड़बड़ी का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उठ गया है। युवा जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव योगेन्द्र देवांगन का कहना है कि सिर्फ आर्थिक दंड काफी नहीं है, दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

देवांगन बुधवार को कलेक्टर धमतरी से मिलकर सरपंच को छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत पद से हटाने की मांग करेंगे। वे मामले में FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग भी रखेंगे।
यह मामला फिलहाल शिकायत और जांच के स्तर पर है। अनियमितता से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

सिर्री पंचायत में मनरेगा कार्य को लेकर क्या है मामला?
शिकायत ग्राम पंचायत सिर्री में दोतेसरी तालाब नवीनीकरण और रिटेनिंग वॉल निर्माण कार्य से जुड़ी है। इसे मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज कराया गया था।
शिकायत की जांच के बाद जनपद पंचायत कुरूद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 22 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी किया। पत्र में उल्लेख है कि बिना कार्य किए मजदूरों की उपस्थिति मस्टर रोल में दर्ज कर भुगतान कराया गया।

पत्र में कितनी शास्ति और वसूली का जिक्र?
देवांगन के अनुसार, उक्त पत्र में ये कार्रवाइयां बताई गई हैं:
- सरपंच: ₹7,000 की शास्ति
- तकनीकी सहायक: ₹2,000 की शास्ति
- रोजगार सहायक: ₹1,000 की शास्ति
- वसूली: ₹25,317 की वसूली के लिए कार्रवाई
योगेन्द्र देवांगन की प्रमुख मांगें क्या हैं?
देवांगन कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर ये मांगें रखेंगे:
- सरपंच के खिलाफ धारा 40 के तहत पद से हटाने की कार्रवाई शुरू हो
- अनियमितताओं की निष्पक्ष और विस्तृत जांच हो
- सबूत मिलने पर FIR दर्ज की जाए
- ₹25,317 की वसूली की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो और राशि जमा होने का प्रमाण दिया जाए
- शिकायत पर हुई कार्रवाई, वसूली और आगे की जांच पर लिखित जवाब मिले
किन दस्तावेजों की जांच की मांग?
देवांगन ने मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान अभिलेख और निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने को कहा है।
मनरेगा में जवाबदेही का सवाल क्यों अहम?
मनरेगा ग्रामीण मजदूरों को रोजगार देने की योजना है। देवांगन का तर्क है कि अगर बिना काम कराए मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर भुगतान हुआ है, तो यह गंभीर मामला है और सिर्फ शास्ति लगाकर इसे खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
उनके शब्दों में, सरकारी खजाना किसी की निजी संपत्ति नहीं है और जनता के पैसे का हिसाब देना हर जिम्मेदार व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत द्वेष की नहीं, बल्कि गांव के विकास, मजदूरों के अधिकार और सरकारी धन की सुरक्षा की है।
आगे क्या होगा?
अब देखना होगा कि कलेक्टर स्तर पर ज्ञापन पर क्या कार्रवाई होती है। सरपंच के खिलाफ धारा 40 की प्रक्रिया शुरू होती है या नहीं और FIR दर्ज होती है या नहीं, इस बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। सरपंच या प्रशासन का पक्ष भी अभी सामने नहीं आया है।









