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महासमुंद के तरकश से निकले ‘तीरंदाजी के सितारे’, राष्ट्रीय अकादमियों में दिखा रहे हैं दम

महासमुंद के तरकश से निकले ‘तीरंदाजी के सितारे’, राष्ट्रीय अकादमियों में दिखा रहे हैं दम

मुख्य बिंदु:

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  • छत्तीसगढ़ का महासमुंद जिला बन रहा है तीरंदाजी का नया गढ़।

  • जिले के 23 प्रतिभाशाली खिलाड़ी देश की प्रतिष्ठित खेल अकादमियों में ले रहे हैं प्रशिक्षण।

  • नेशनल गेम्स में चांदनी साहू ने जीता पदक, मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित।

  • जमीनी स्तर पर एकलव्य विद्यालय और स्थानीय स्कूल तैयार कर रहे हैं प्रतिभा की नर्सरी।

महासमुंद: महासमुंद के तरकश से निकले ‘तीरंदाजी के सितारे’, छत्तीसगढ़ का महासमुंद जिला खेल, और विशेषकर पारंपरिक खेल तीरंदाजी के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। यह जिला अब एक ऐसी नर्सरी बन चुका है, जहां से निकले तीरंदाज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। आज जिले के 23 होनहार खिलाड़ी भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) समेत देश की शीर्ष खेल अकादमियों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जो इस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।

पद्मा और चांदनी: प्रेरणा की नई मिसाल

महासमुंद की बेटी पद्मा साहू आज जिले के सैकड़ों युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के सोनीपत (हरियाणा) केंद्र के लिए हुआ है, जहां वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण ले रही हैं।महासमुंद के तरकश से निकले ‘तीरंदाजी के सितारे’

वहीं, हाल ही में उत्तराखंड में आयोजित 38वें नेशनल गेम्स 2025 में चांदनी साहू ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत इंडियन राउंड में रजत पदक और टीम इवेंट में कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। उनकी इस सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें नकद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित भी किया।महासमुंद के तरकश से निकले ‘तीरंदाजी के सितारे’

जमीनी स्तर पर प्रतिभा को तराशने का काम

यह सफलता कोई एक दिन की कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत जमीनी ढांचा काम कर रहा है।महासमुंद के तरकश से निकले ‘तीरंदाजी के सितारे’

  • स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र: एकलव्य आवासीय विद्यालय (भोरिंग) और बॉल आश्रम (बिहाझर, बागबाहरा) जैसे केंद्रों ने इन खिलाड़ियों के लिए शुरुआती नर्सरी का काम किया है। यहां प्रशिक्षक एवन कुमार साहू, डॉ. सुनील भोई, और पिरित साहू जैसे कोचों ने इन हीरों को तराशने में अहम भूमिका निभाई है।

  • स्कूली स्तर पर पहल: पीएमश्री आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (बकमा, कोमाखान) जैसे स्कूलों में तीरंदाजी को बढ़ावा देकर शुरुआती स्तर पर ही प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

राष्ट्रीय अकादमियों में महासमुंद का दबदबा

जिले की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के 11 खिलाड़ी साईं (SAI) रायपुर और कोदूराम वर्मा खेल अकादमी में, जबकि 11 अन्य खिलाड़ी खेलो इंडिया सेंटर बिलासपुर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन 23 खिलाड़ियों के अलावा भी कई अन्य तीरंदाज राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जिले का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।महासमुंद के तरकश से निकले ‘तीरंदाजी के सितारे’

इस पूरी सफलता की कहानी में जिला प्रशासन के मार्गदर्शन, विशेषकर कलेक्टर विनय लंगेह के प्रयासों और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे इन खिलाड़ियों को सही संसाधन और मंच मिल सका है।महासमुंद के तरकश से निकले ‘तीरंदाजी के सितारे’

Nidar Chhattisgarh Desk

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