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जशपुर की चाय क्रांति: पहाड़ी कोरवा बनेंगे बागानों के मालिक, पर्यटन को मिल रही नई उड़ान

जशपुर की चाय क्रांति: पहाड़ी कोरवा बनेंगे बागानों के मालिक, पर्यटन को मिल रही नई उड़ान

जब भी भारत में चाय की चर्चा होती है, तो असम और दार्जिलिंग का नाम सहज ही जुबान पर आ जाता है। लेकिन अब छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला भी चाय की खेती और अपनी खास खुशबू के लिए एक नई पहचान बना रहा है। यहां न केवल उच्च गुणवत्ता वाली चाय का उत्पादन हो रहा है, बल्कि यह क्षेत्र टी-टूरिज्म के एक नए केंद्र के रूप में भी उभर रहा है, जिससे स्थानीय आदिवासी समुदायों, विशेषकर राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।जशपुर की चाय क्रांति

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सफलता की कहानी: सोगड़ा और सारूडीह के चाय बागान

जशपुर जिला मुख्यालय से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोगड़ा आश्रम द्वारा निजी तौर पर विकसित चाय बागान और सारूडीह में जिला प्रशासन द्वारा विकसित बागान की सफलता ने इस क्षेत्र में चाय की खेती की अपार संभावनाओं को उजागर किया है। इन शुरुआती सफलताओं ने स्थानीय आदिवासियों के लिए आजीविका के नए द्वार खोल दिए हैं।जशपुर की चाय क्रांति

  • क्षेत्र विस्तार: जिले के बगीचा विकासखंड के ग्राम छिछली और मनोरा विकासखंड के ग्राम सारूडीह में चाय की खेती का विस्तार किया गया है। वर्तमान में लगभग 95.50 एकड़ भूमि पर करीब साढ़े तीन लाख चाय के पौधे लहलहा रहे हैं।जशपुर की चाय क्रांति

पहाड़ी कोरवाओं के लिए सुनहरा अवसर

राज्य सरकार और जिला प्रशासन की एक महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र माने जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय को भी चाय की खेती से जोड़ा जा रहा है। योजना का उद्देश्य न केवल उन्हें रोजगार प्रदान करना है, बल्कि उनकी हक की जमीन पर चाय की खेती कर उन्हें बागानों का मालिक बनाना भी है। यह पहल उनके आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण में मील का पत्थर साबित हो सकती है।जशपुर की चाय क्रांति

जशपुर की चाय: गुणवत्ता और प्रकार

जशपुर में उगाई जा रही चाय की पत्तियों की विशिष्ट सुगंध और गुणवत्ता की चर्चा दूर-दूर तक हो रही है। यहां मुख्य रूप से दो प्रकार की चाय तैयार की जा रही है:

  1. सीटीसी (CTC) चाय

  2. ग्रीन टी (Green Tea)

इन चायों को प्रोसेस करने के लिए बाछापर (निजी) और सोगड़ा (शासकीय) में प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किए गए हैं। स्थानीय आदिवासियों को चाय बागानों का मालिक बनते देख, अन्य किसान भी चाय की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।जशपुर की चाय क्रांति

भविष्य की व्यापक योजनाएं: जशपुर बनेगा चाय हब

प्रशासन की योजना है कि आने वाले समय में चाय की खेती का दायरा लगभग 500 एकड़ तक बढ़ाया जाए। इसके लिए एक वृहद कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है, जिसमें शामिल हैं:

  • पौध रोपण का विस्तार

  • अत्याधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना

  • आकर्षक पैकिंग

  • प्रभावी मार्केटिंग रणनीतियां

इस योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य जशपुर जिले को “वन डिस्ट्रिक्ट, वन फोकस प्रोडक्ट” के तहत चाय आधारित उद्योग के लिए एक विशिष्ट पहचान दिलाना भी है।जशपुर की चाय क्रांति

चाय बागान: नए पर्यटन स्थल के रूप में उभरते जशपुर

जशपुर के चाय बागान सिर्फ आर्थिक उन्नति ही नहीं, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहे हैं। जिला मुख्यालय से केवल तीन किलोमीटर दूर, सुरम्य पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित सारूडीह चाय बागान, वन विभाग के मार्गदर्शन में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। सारूडीह के साथ-साथ सोगड़ा आश्रम के चाय बागान भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। ये स्थान तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जिससे जशपुर को एक नई पर्यटन पहचान मिल रही है।जशपुर की चाय क्रांति

यह पहल न केवल जशपुर की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दे रही है।जशपुर की चाय क्रांति

Nidar Chhattisgarh Desk

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