SECL की ज़्यादती: भुविस्थापितों के घरों की बिजली काटकर कर रहे हैं प्रताड़ित

कोरबा: साउथ ईस्ट कोलफील्ड लिमिटेड (SECL) द्वारा प्रभावित ग्रामीणों के साथ किए गए अत्याचारों का मामला अब एक नई दिशा में बढ़ता जा रहा है। SECL की गेवरा परियोजना ने ग्राम पंचायत अमगांव का अधिग्रहण किया था, और अब इसके खनन कार्य को दीपका प्रबंधन को सौंप दिया गया है। इसके बाद, स्थानीय ग्रामीणों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उनके घरों की बिजली काटना और उन्हें मकान खाली करने के लिए दबाव डालना शामिल है। SECL की ज़्यादती: भुविस्थापितों के घरों की बिजली काटकर कर रहे हैं प्रताड़ित
SECL द्वारा बिजली काटने की कार्रवाई
ग्राम पंचायत अमगांव के जोकाही, डबरी, दर्राखांचा और अन्य प्रभावित इलाकों में SECL के कर्मचारियों द्वारा दबाव बनाकर ग्रामीणों के घरों में लगी बिजली की लाइनें काट दी गई हैं। SECL के कर्मचारी अनिल पाटले ने इन घरों में घुसकर बिजली काटने की कार्रवाई की। इस कृत्य से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और कई परिवार अंधेरे में रात बिताने को मजबूर हो गए। SECL की ज़्यादती: भुविस्थापितों के घरों की बिजली काटकर कर रहे हैं प्रताड़ित
रोजगार और मुआवजे का मामला अब तक लंबित
ग्रामीणों के रोजगार, मुआवजे और पुनर्वास का मामला अब तक लंबित है, और SECL प्रबंधन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि SECL को पहले उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए था, उसके बाद खनन और खदान विस्तार कार्य को प्राथमिकता देनी चाहिए थी। बावजूद इसके, SECL प्रबंधन ने केवल खनन कार्य को प्राथमिकता दी है और ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज किया है। SECL की ज़्यादती: भुविस्थापितों के घरों की बिजली काटकर कर रहे हैं प्रताड़ित
SECL पर आरोप: देवस्थलों का अपमान
ग्रामीणों का आरोप है कि SECL कर्मचारियों ने उनके देवस्थलों, जिनमें जैतखाम शामिल हैं, को नुकसान पहुंचाया है। यह स्थान धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, और आदिवासी तथा दलित समुदाय के लोग यहां पूजा-अर्चना करते हैं। SECL के कर्मचारियों ने इन धार्मिक स्थानों को अपमानित किया और ग्रामीणों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। SECL की ज़्यादती: भुविस्थापितों के घरों की बिजली काटकर कर रहे हैं प्रताड़ित
SECL प्रबंधन का दबाव और उत्पीड़न
ग्रामीणों के अनुसार, SECL प्रबंधन ने उनके खिलाफ कानूनी दबाव बनाने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का सहारा लिया है। कई ग्रामीणों पर थाने में मामले दर्ज किए गए हैं और उन्हें घरों को खाली करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। SECL की यह कार्यशैली ग्रामीणों के लिए मानसिक तनाव और नाराजगी का कारण बन रही है। SECL की ज़्यादती: भुविस्थापितों के घरों की बिजली काटकर कर रहे हैं प्रताड़ित
समस्याओं का समाधान न होने से आक्रोश
ग्रामीणों ने SECL प्रबंधन और जिला प्रशासन से बार-बार समस्याओं के समाधान की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। इस उत्पीड़न के खिलाफ ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से शिकायत करने का मन बना लिया है। वे मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस अधीक्षक और अन्य संबंधित अधिकारियों से अपनी शिकायतें दर्ज कराने की योजना बना रहे हैं। SECL की ज़्यादती: भुविस्थापितों के घरों की बिजली काटकर कर रहे हैं प्रताड़ित



















