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अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे! वेनेजुएला की बर्बादी से भारत ने लिया बड़ा सबक, सेना को बना रहा है महाशक्ति

अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे: आज की भागती दुनिया में अक्सर यह कहा जाता था कि “जिसके पास तेल है, वही दुनिया पर राज करेगा।” लेकिन वेनेजुएला के मौजूदा हालात ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। दुनिया को अब समझ आ गया है कि प्राकृतिक संसाधन होना एक बात है, लेकिन उनकी सुरक्षा करने की ताकत होना दूसरी बात। भारत ने इस बदलाव को समय रहते पहचान लिया है और अब देश का पूरा ध्यान अपनी रक्षा प्रणाली (Defense System) को अभेद्य बनाने पर है।

वेनेजुएला का संकट: सिर्फ संसाधन होने से देश सुरक्षित नहीं होता

अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे: वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (Oil Reserves) है, लेकिन आज वह अपनी कुल क्षमता का 1% तेल भी ठीक से सप्लाई नहीं कर पा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण सैन्य कमजोरी, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक कुप्रबंधन है। जिस तेल को देश की ताकत बनना चाहिए था, वह उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया। अमेरिका और अन्य शक्तियों के दबाव में वेनेजुएला की संप्रभुता कमजोर हुई, क्योंकि उसके पास अपनी रक्षा करने के लिए एक आधुनिक और मजबूत सैन्य ढांचा नहीं था।

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अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे: विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला के इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा करने में अब कई दशक लग सकते हैं। यह इस बात का सबूत है कि बिना सैन्य शक्ति के आर्थिक संसाधन भी सुरक्षित नहीं रह सकते।

अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे: ‘डिफेंस’ है इस दशक की सबसे बड़ी थीम

शेयर बाजार के दिग्गजों और रणनीतिकारों का मानना है कि आने वाला दशक पूरी तरह से डिफेंस सेक्टर के नाम रहने वाला है। अब किसी देश की असली ताकत सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार या एक्सपोर्ट में नहीं, बल्कि इस बात में है कि वह अपनी सीमाओं और व्यापारिक हितों की रक्षा कितनी मजबूती से कर सकता है।

अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे: हालिया वैश्विक तनाव और वेनेजुएला जैसे उदाहरणों ने यह साफ कर दिया है कि अगर डिफेंस मजबूत नहीं है, तो आर्थिक प्रगति कभी भी ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है। यही वजह है कि डिफेंस अब केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि निवेश और विकास की सबसे बड़ी ‘थीम’ बन चुका है।

भारत की रणनीतिक तैयारी: सेना का आधुनिकीकरण और नए समझौते

अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे: भारत ने इस वैश्विक बदलाव को भांपते हुए डिफेंस सेक्टर में निवेश की रफ्तार को कई गुना बढ़ा दिया है। हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए 4,666 करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

1. अत्याधुनिक हथियारों से लैस होंगे सैनिक

अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे: सरकार ने 4.25 लाख से ज्यादा क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) कार्बाइन खरीदने का फैसला किया है। करीब 2,770 करोड़ रुपये के इस सौदे में ‘भारत फोर्ज’ और ‘PLR सिस्टम्स’ जैसे भारतीय संस्थान शामिल हैं। इससे थल सेना और नौसेना के जवानों को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार किया जा रहा है।

2. समंदर में बढ़ेगी ‘कलवरी’ की ताकत

अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे: भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए कलवरी क्लास पनडुब्बियों के लिए 48 हेवी वेट टॉर्पिडो खरीदे जा रहे हैं। 1,896 करोड़ रुपये के इस सौदे से भारतीय नौसेना की प्रहार क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। ये टॉर्पिडो 2028 से मिलने शुरू होंगे और 2030 तक सेना का हिस्सा बन जाएंगे।

आत्मनिर्भर भारत और डिफेंस बजट का धमाका

अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे: वित्त वर्ष 2026 के लिए रक्षा मंत्रालय ने अब तक 1,82,492 करोड़ रुपये के आधुनिकरण सौदों पर मुहर लगा दी है। इसके अलावा, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने हाल ही में 79,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त खरीद को मंजूरी दी है।

‘मेक इन इंडिया’ का बड़ा असर:

  • तेजस फाइटर जेट्स: HAL के साथ करीब 48,000 करोड़ रुपये की डील हुई है, जिसके तहत 83 स्वदेशी तेजस Mk-1A विमान वायुसेना को मिलेंगे।

  • प्रचंड हेलिकॉप्टर: लद्दाख जैसे ऊंचे इलाकों में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए 156 ‘प्रचंड’ लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर्स की 62,700 करोड़ रुपये की डील इतिहास की सबसे बड़ी डिफेंस डील्स में से एक है।

रक्षा ही समृद्धि की कुंजी है

अगले 10 साल ‘तेल’ के नहीं ‘डिफेंस’ के होंगे: भारत का डिफेंस पर यह भारी निवेश केवल युद्ध की तैयारी नहीं, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता की गारंटी है। वेनेजुएला के उदाहरण ने सिखाया है कि अगर संप्रभुता सुरक्षित नहीं है, तो खजाना किसी काम का नहीं। भारत अब “डिफेंस फर्स्ट” की नीति अपनाकर न केवल अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि रक्षा निर्माण (Defense Manufacturing) के क्षेत्र में दुनिया का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

Dr. Tarachand Chandrakar

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