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डूब रहा है तुवालू: जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा यह देश?

डूब रहा है तुवालू: जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा यह देश?

डूब रहा है तुवालू, प्रशांत महासागर की लहरें एक पूरे देश को निगलने के लिए तैयार हैं। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि तुवालू नामक एक छोटे और खूबसूरत द्वीपीय देश की दर्दनाक हकीकत है। जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, और तुवालू के अस्तित्व पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है।

वैज्ञानिकों और सैटेलाइट डेटा के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में समुद्र का स्तर 15 सेंटीमीटर तक बढ़ चुका है। यह तुवालू जैसे देश के लिए खतरे की घंटी है, जिसकी औसत ऊंचाई समुद्र तल से सिर्फ 2 मीटर है। अनुमान है कि अगले कुछ दशकों में यह देश रहने लायक नहीं बचेगा।डूब रहा है तुवालू

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क्यों डूब रहा है तुवालू? संकट की पूरी सच्चाई

तुवालू का संकट जलवायु परिवर्तन का एक सीधा और भयावह परिणाम है। यह देश 9 प्रवाल द्वीपों (coral islands) और एटोल से मिलकर बना है।डूब रहा है तुवालू

  • अस्तित्व का संकट: लगभग 11,000 की आबादी वाले इस देश के दो द्वीप पहले ही समुद्र में समा चुके हैं।

  • भविष्य का अनुमान: वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ग्लोबल वार्मिंग की मौजूदा रफ्तार जारी रही, तो 2050 तक तुवालू का अधिकांश हिस्सा, जिसमें घर, सड़कें और बुनियादी ढांचे शामिल हैं, पानी के नीचे होगा।

  • सबसे बड़ा जोखिम: इसे दुनिया के उन देशों में गिना जाता है, जिन पर जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा खतरा है।

ऑस्ट्रेलिया बना ‘लाइफबोट’: क्या है फलेपिली यूनियन संधि?

अपने नागरिकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तुवालू ने ऑस्ट्रेलिया के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है।डूब रहा है तुवालू

  • ऐतिहासिक संधि: साल 2023 में दोनों देशों ने ‘फलेपिली यूनियन संधि’ पर हस्ताक्षर किए। ‘फलेपिली’ का स्थानीय भाषा में अर्थ ‘अच्छा पड़ोसी’ होता है।

  • पुनर्वास का अवसर: इस संधि के तहत, ऑस्ट्रेलिया हर साल तुवालू के 280 नागरिकों को अपने यहां बसने का मौका देगा। इन नागरिकों को स्थायी निवास के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के पूरे अधिकार मिलेंगे।

  • चयन प्रक्रिया: नागरिकों का चयन लॉटरी (बैलेट) सिस्टम के जरिए किया जाएगा, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष रहे। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के अनुसार, यह संधि लोगों को सम्मान के साथ एक नया जीवन शुरू करने का अवसर देगी।

कैसा है तुवालू का जीवन? ‘.tv’ डोमेन से चलती है अर्थव्यवस्था

डूबने के खतरे के बीच, तुवालू की अपनी एक अनूठी पहचान और संस्कृति है।डूब रहा है तुवालू

  • क्षेत्रफल और पर्यटन: यह देश महज 26 वर्ग किलोमीटर में फैला है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण हर साल लगभग 2,000 पर्यटकों को आकर्षित करता है।

  • अनोखी अर्थव्यवस्था: इसकी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा इसके इंटरनेट डोमेन ‘.tv’ की बिक्री से आता है, जिसे दुनिया भर की मीडिया और टेलीविजन कंपनियां खरीदती हैं।

  • कैश-आधारित प्रणाली: यहां कोई एटीएम नहीं है और क्रेडिट कार्ड भी स्वीकार नहीं किए जाते। पर्यटकों को अपने साथ पर्याप्त मात्रा में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर नकद रखने की सलाह दी जाती है।

भविष्य की राह: कितने लोग छोड़ेंगे अपना घर?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस संधि और अन्य तरीकों से हर साल तुवालू की लगभग 4% आबादी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में पलायन करेगी। इसका मतलब है कि अगले एक दशक में लगभग 40% लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं, हालांकि कुछ लोगों के वापस लौटने की भी संभावना है।डूब रहा है तुवालू

एक डूबते देश की दुनिया से अपील

तुवालू के प्रधानमंत्री फेलेटी टेओ ने इस संकट को “अस्तित्व के लिए खतरा” बताते हुए वैश्विक समुदाय से तत्काल कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने एक नई वैश्विक संधि की मांग की है, ताकि तुवालू जैसे उन सभी देशों के अधिकारों की रक्षा की जा सके, जो समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण अपना अस्तित्व खोने की कगार पर हैं।डूब रहा है तुवालू

Nidar Chhattisgarh Desk

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