छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश से धान को नुकसान, पटवारी हड़ताल से सर्वे पर सवाल

छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश से कई जिलों में तैयार धान की फसल प्रभावित हुई। पटवारी हड़ताल के बीच मुख्यमंत्री ने नुकसान के आकलन के निर्देश दिए हैं।
छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश से कई जिलों में कटाई के लिए तैयार धान की फसल प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने से कहीं बालियां डूबी हैं, तो कहीं तेज हवा और बारिश से फसल जमीन पर बिछ गई है। रिपोर्टों के अनुसार इसके पीछे चक्रवाती तूफान के असर की बात कही जा रही है।

मुश्किल यह है कि नुकसान के आकलन में अहम भूमिका निभाने वाले पटवारी 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी कलेक्टरों को प्रभावित फसलों का आकलन कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन हड़ताल के बीच सर्वे की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी, यह स्पष्ट नहीं है।
एक नज़र में
- कारण: बेमौसम बारिश, जिसे चक्रवाती तूफान के असर से जोड़ा जा रहा है (आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं)
- असर: कई जिलों में तैयार धान की फसल प्रभावित
- पटवारी हड़ताल: 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन
- सरकार: मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को नुकसान के आकलन के निर्देश दिए
- कांग्रेस की मांग: पूरी फसल गंवाने वाले किसानों को 70,518 रुपए प्रति एकड़
खेतों में कितना नुकसान हुआ?
धान छत्तीसगढ़ के किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है। कई इलाकों में फसल पककर तैयार थी और कटाई की तैयारी चल रही थी, तभी मौसम बदल गया। लगातार बारिश से खेतों में पानी जमा है। पानी में गिरी बालियों के खराब होने और दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। कुल प्रभावित रकबे या नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।

गांवों से किसानों का हाल
रायपुर, परसट्टी: किसान जिनी चेलक ने करीब पांच एकड़ में धान लगाया था। उनके मुताबिक तैयार फसल खेत में गिर गई। उन्होंने बताया कि शुरुआत में खाद मिलने में भी परेशानी हुई थी। अब उन्हें मुआवजे की चिंता है।
गरियाबंद, सीनापाली (देवभोग): किसान दुर्बल राम गिरी पौधे उठाकर आपस में बांध रहे हैं, ताकि बालियां लंबे समय तक पानी में न रहें और सड़ने से बच सकें।

बलौदाबाजार, पलारी: किसान झड़ी राम कन्नौजे के करीब छह से सात एकड़ खेत में पानी भर गया है। निकासी की सही व्यवस्था न होने से नुकसान बढ़ने की आशंका है।
पटवारी हड़ताल का क्या असर?
पटवारी 13 अक्टूबर से नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें कई जिलों के पटवारी शामिल हैं। संघ की प्रमुख मांगें:
- पीवी ऐप से जुड़ी आपत्तियों का समाधान
- वेतन विसंगति दूर करना
- पदोन्नति की व्यवस्था
संघ के कोषाध्यक्ष देवेंद्र कुमार कर्ष ने माना कि किसानों को नुकसान हुआ है। संघ का कहना है कि सरकार बातचीत से हल निकाले।
सर्वे में देरी हुई तो क्या होगा?
फसल नुकसान का आकलन राहत प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। किसानों को आशंका है कि सर्वे में देर हुई तो मुआवजे में भी देर हो सकती है। साथ ही, बारिश के बाद खेतों की स्थिति बदलने से असली नुकसान का आकलन कठिन हो सकता है।
मुख्यमंत्री के निर्देश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को प्रभावित फसलों का आकलन कराने को कहा है। उन्होंने नियमानुसार सहायता देने और सर्वे व राहत वितरण में अनावश्यक देरी न करने के निर्देश दिए हैं।
कांग्रेस की मांग क्या है?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने किसानों को जल्द आर्थिक सहायता देने की मांग की है। पार्टी ने पूरी फसल गंवाने वाले किसानों के लिए 70,518 रुपए प्रति एकड़ की मांग रखी है। पार्टी के मुताबिक यह राशि 3,358 रुपए प्रति क्विंटल की दर और 21 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन पर आधारित है।
यह कांग्रेस की राजनीतिक मांग है, सरकार की घोषित राशि नहीं। बैज ने हड़ताल से धान खरीदी और पंजीयन के काम पर असर की आशंका भी जताई है।
आगे क्या देखना होगा?
किसानों की नजर दो बातों पर रहेगी: सर्वे कितनी तेजी से शुरू होता है और पटवारियों की हड़ताल का समाधान कब निकलता है। हड़ताल के दौरान सर्वे कैसे होगा, इस पर प्रशासन की ओर से अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है।
FAQ
छत्तीसगढ़ में धान की फसल को नुकसान क्यों हुआ?
बेमौसम बारिश से खेतों में पानी भरा और कई जगह फसल गिर गई। इसे चक्रवाती तूफान के असर से जोड़ा जा रहा है।
मुआवजे का सर्वे क्यों अटक सकता है?
पटवारी 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जबकि नुकसान के आकलन में राजस्व अमले की अहम भूमिका होती है।
कांग्रेस ने कितना मुआवजा मांगा है?
पूरी फसल गंवाने वाले किसानों के लिए 70,518 रुपए प्रति एकड़। यह कांग्रेस की मांग है, सरकार की घोषित राशि नहीं।









