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बिलासपुर

शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत करना पड़ सकता है भारी, बिलासपुर की तीन महिला कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया

शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत करना पड़ सकता है भारी, बिलासपुर की तीन महिला कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया

? स्थान: बिलासपुर, छत्तीसगढ़
?‍? प्रभावित कर्मचारी: सुषमा पांडेय (सहायक ग्रेड-3), गीता राही व रश्मि विश्वकर्मा (भृत्य)
? मुद्दा: वेतन अटका, शिकायत की — निलंबन मिला
? घटना काल: मार्च 2025

? शिकायत की तो उल्टा निलंबन का आदेश! शिक्षा विभाग में अनुशासन के नाम पर अन्याय?

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शिक्षा विभाग में तीन महिला कर्मचारियों को सिर्फ इसलिए निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने अपने रुके हुए वेतन को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी।
यह मामला शिक्षा महकमे में पद के दुरुपयोग और कर्मचारी उत्पीड़न का प्रतीक बनता जा रहा है

शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत करना पड़ सकता है भारी

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⚖️ क्या है मामला?

बिलासपुर के शासकीय हाईस्कूल जरहाभांठा में कार्यरत तीन महिला कर्मचारियों — सुषमा पांडेय, गीता राही और रश्मि विश्वकर्मा — का वेतन विभागीय लापरवाही के चलते समय पर नहीं मिला।शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत करना पड़ सकता है भारी
जब उन्होंने इसकी शिकायत प्राचार्य से की, तो उन्हें अनदेखा कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने DEO कार्यालय में जाकर अपनी बात रखी। शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत करना पड़ सकता है भारी

? कलेक्टर से की गई शिकायत बनी मुसीबत

DEO से मदद नहीं मिलने पर तीनों महिला कर्मी बिलासपुर कलेक्टर अवनीश शरण से मिलने पहुंचीं।
कलेक्टर ने मामले को गंभीर मानते हुए DEO को फटकार लगाई और वेतन जारी करने का निर्देश दिया। लेकिन इसका नतीजा ये हुआ कि DEO ने उल्टे तीनों महिला कर्मचारियों पर शो-कॉज नोटिस जारी किया और निलंबन आदेश दे दिया।

शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत करना पड़ सकता है भारी

? क्या है निलंबन आदेश में?

निलंबन का आधार बताया गया कि तीनों ने संस्था प्रमुख की अनुमति के बिना उच्च अधिकारियों से शिकायत की और उन्हें समझाइश देने के बावजूद अनुशासनहीनता जारी रखी।
आदेश में सिविल सेवा आचरण नियम 1965 की धारा 3 का हवाला दिया गया है।

? असली वजह क्या थी?

  • विद्यालय के क्लर्क ऋतुपर्ण सिंह लंबे समय से अनुपस्थित थे।
  • जानकारी के अनुसार, वे अपनी पत्नी के पंचायत चुनाव प्रचार में लगे हुए थे, जबकि आचार संहिता लागू थी।
  • क्लर्क के अनुपस्थित रहने से वेतन पत्रक नहीं बन सका और तीनों कर्मचारियों का वेतन अटक गया।
  • अन्य स्टाफ को वेतन मिल गया, लेकिन इन तीनों को नहीं।

?‍? कर्मचारी संगठनों ने उठाए सवाल

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर पांडेय ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि

“वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत करना अनुशासनहीनता नहीं है। पहले जांच होनी चाहिए थी, फिर निर्णय।”

संघ ने यह भी कहा कि अगर कार्रवाई वापस नहीं ली गई तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

? क्या दोषी क्लर्क और प्रिंसिपल पर होगी कार्रवाई?

मूल विवाद का केंद्र बने क्लर्क ऋतुपर्ण सिंह और प्रिंसिपल मोहनजीत कौर पर अब तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सिर्फ शिकायत करने वालों को नहीं, वास्तविक दोषियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत करना पड़ सकता है भारी

❓ अब क्या कलेक्टर करेंगे हस्तक्षेप?

कलेक्टर अवनीश शरण इस पूरे प्रकरण से पहले ही अवगत हैं और उन्होंने कर्मचारियों की बात सुनी थी।
अब सवाल है कि क्या वे इस मामले में DEO द्वारा की गई सजा को न्याय की कसौटी पर परखेंगे और महिला कर्मचारियों को न्याय दिलाएंगे?

 

  • शिकायत करना अगर अनुशासनहीनता है, तो लोकतंत्र का क्या मतलब?
  • शिक्षा विभाग में प्रशासनिक जवाबदेही की सख्त जरूरत है।
  • निचले स्तर के कर्मचारियों की आवाज को दबाना लोकतंत्र के मूल मूल्यों के विपरीत है।

 

Nidar Chhattisgarh Desk

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