कोरबा में मौसम का मिजाज बदला: बेमौसम बारिश से भीग सकता है 5 लाख क्विंटल धान, किसानों की बढ़ी चिंता

कोरबा मौसम अपडेट: कोरबा में मौसम का मिजाज बदला: बेमौसम बारिश से भीग सकता है 5 लाख क्विंटल धान, किसानों की बढ़ी चिंता, छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में अचानक हुए मौसम परिवर्तन ने धान खरीदी केंद्रों और किसानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। मंगलवार दोपहर को तेज हवाओं के साथ हुई रिमझिम बारिश ने न केवल तापमान में गिरावट दर्ज की, बल्कि खुले आसमान के नीचे रखे लाखों क्विंटल धान के सुरक्षित रखरखाव पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
धान खरीदी केंद्रों में सुरक्षा की चुनौती
कोरबा में मौसम का मिजाज बदला:जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों (Procurement Centers) में वर्तमान में लगभग 5 लाख क्विंटल धान डंप पड़ा हुआ है। मौसम में आए इस अचानक बदलाव और बारिश के कारण समितियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। यदि बारिश का दौर जारी रहता है, तो बोरियों के भीगने से धान के सड़ने और खराब होने की पूरी आशंका है। प्रशासन और समितियों के सामने इस विशाल भंडार को सुरक्षित रखने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
तीन चक्रवाती सिस्टम का असर: क्यों बदला मौसम?
कोरबा में मौसम का मिजाज बदला:मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदेश में इस समय तीन अलग-अलग चक्रवाती सिस्टम सक्रिय हैं, जिसका सीधा असर कोरबा जिले में देखने को मिल रहा है। मंगलवार सुबह जहां तेज धूप खिली थी, वहीं दोपहर 2 बजे के बाद अचानक घने बादल छा गए। गरज-चमक के साथ लगभग आधे घंटे तक हुई बारिश ने सड़कों को तरबतर कर दिया।
कोरबा में मौसम का मिजाज बदला:मौसम विभाग ने अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया है, जबकि आने वाले 2 से 3 दिनों तक मौसम का मिजाज इसी तरह बने रहने का अनुमान जताया है।
शहर की बिजली व्यवस्था हुई ध्वस्त
कोरबा में मौसम का मिजाज बदला:हल्की बारिश और तेज हवाओं ने शहरी क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति की पोल खोलकर रख दी है। दर्री जोन, पाड़ीमार और तुलसीनगर जैसे प्रमुख इलाकों में घंटों बिजली गुल रही। हालांकि कुछ क्षेत्रों में आधे घंटे बाद आपूर्ति बहाल हो गई, लेकिन कई मोहल्लों में लोगों को काफी देर तक अंधेरे में रहना पड़ा, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ।
किसानों पर दोहरी मार: फसलों को नुकसान की आशंका
कोरबा में मौसम का मिजाज बदला:अचानक हुई इस बारिश ने केवल धान संग्रहण केंद्रों को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि खेतों में खड़ी फसलों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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आम की फसल: तेज हवाओं के कारण आम के बौर झड़ गए हैं, जिससे उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है।
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रबी फसलें: दलहन (दालें), तिलहन और मौसमी सब्जियों की फसलों में नमी बढ़ने से कीटों के प्रकोप और फसल खराब होने का डर सता रहा है।
कोरबा में मौसम का मिजाज बदला:स्थानीय किसान अब आसमान की ओर इस उम्मीद से देख रहे हैं कि मौसम जल्द साफ हो जाए, ताकि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।









