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कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़: जांच को प्रभावित करने के आरोप, वन विभाग पर लीपापोती का संदेह

जिला पंचायत सभापति को जानबूझकर देर से भेजा गया जांच का निमंत्रण पत्र, अधिकारी पर भ्रष्टाचार के पुराने मामले भी सुर्खियों में

कोरबा : कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़: जांच को प्रभावित करने के आरोप, वन विभाग पर लीपापोती का संदेह, कोरबा वन मंडल में कैंपा मद से निर्मित तालाबों में हुए कथित लाखों रुपये के घोटाले की जांच में अब नया और गंभीर मोड़ आ गया है। इस मामले को लेकर वन विभाग पर लीपापोती के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य और वन विभाग की सभापति सावित्री अजय कंवर ने दावा किया है कि जांच को प्रभावित करने के लिए उन्हें जानबूझकर देर से सूचना दी गई, जिससे वे तय तिथि पर उपस्थित न हो सकें। यह घटनाक्रम वन विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या है पूरा मामला?

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कोरबा रेंज के नकटीखार से लगे इलाके में कैंपा मद के तहत तीन तालाबों का निर्माण कराया गया था। आरोप है कि इन तालाबों के निर्माण में भारी धांधली की गई है और लाखों रुपये का घोटाला किया गया है। मीडिया और अन्य माध्यमों से यह मामला सामने आने के बाद, जिला पंचायत में वन विभाग की सभापति सावित्री अजय कंवर ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने जून माह में ही कलेक्टर और वन मंडल अधिकारी को एक पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़

जांच में ‘लीपापोती’ के आरोप

कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़: जांच को प्रभावित करने के आरोप, वन विभाग पर लीपापोती का संदेह

सभापति कंवर के पत्र के बाद, मामले की जांच के लिए 15 सितंबर, 2025 की तारीख तय की गई। हालांकि, जांच में उपस्थित होने संबंधी पत्र सभापति को 16 सितंबर को मिला, यानी जांच की निर्धारित तिथि के एक दिन बाद। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पत्र 8 सितंबर को जारी किया गया था, लेकिन महत्वपूर्ण सूचनाओं के आदान-प्रदान के इस दौर में, इसे सभापति तक पहुंचने में पूरे 9 दिन लग गए।कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़

सभापति श्रीमती कंवर ने इस देरी को गहरी साजिश करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “वन विभाग के अधिकारी रेंजर को बचाने में जुटे हुए हैं और भ्रष्ट कारनामे को उजागर होने से बचाने के लिए कहीं न कहीं जांच में लीपापोती का अंदेशा है। उनकी (सभापति की) उपस्थिति न होने पाए इसलिए पत्र एक दिन बाद उन तक पहुंचाया गया।” यह आरोप सीधे तौर पर वन विभाग के अधिकारियों की नीयत पर सवाल खड़े करते हैं।कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़

रेंजर मृत्युंजय शर्मा और विवादित कार्यकाल

इस पूरे घोटाले का केंद्र कोरबा रेंज के रेंजर मृत्युंजय शर्मा हैं, जिनके देखरेख में ये तीनों तालाब निर्मित कराए गए थे। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन परियोजनाओं में लाखों का घोटाला हुआ है। रेंजर शर्मा का कार्यकाल पहले भी कई विवादों से घिरा रहा है।कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़

  • बांस रोपणी कटाई मामला: इससे पहले, मृत्युंजय शर्मा कटघोरा वनमंडल के बांकीमोगरा बांस रोपणी में 550 हरे बांस के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में सुर्खियों में आए थे। यह मामला तब और भी गंभीर हो गया जब उनके ही अधीनस्थ बीट गार्ड शेखर सिंह रात्रे ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। यह प्रकरण उस समय मीडिया में काफी चर्चित रहा था।

  • बागवानी मिशन में रिकवरी: इसके अतिरिक्त, बागवानी मिशन में भी मृत्युंजय शर्मा पर एक करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी निकाली गई थी, जो उनके कार्यकाल में वित्तीय अनियमितताओं का एक और उदाहरण था।

  • पाली रेंज में संदिग्ध भूमिका: पाली रेंज में पदस्थ रहने के दौरान भी जंगल क्षेत्र में कराए जाने वाले सड़क व अन्य निर्माण कार्यों में उनकी भूमिका संदिग्ध रही थी, जिस पर कई सवाल उठे थे।

वर्तमान में कोरबा रेंज में पदस्थ होने के बावजूद, उन पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगातार लग रहे हैं, जो उनके विवादित कार्यकाल को और पुख्ता करते हैं।कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़

कलेक्टर से की गई निष्पक्ष जांच की मांग

जिला पंचायत कोरबा में वन विभाग की सभापति श्रीमती सावित्री अजय कंवर ने कलेक्टर से इस मामले में तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में बताया है कि छत्तीसगढ़ शासन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के माध्यम से कोरबा वन मंडल के अंतर्गत, विशेषकर वन परिक्षेत्र कोरबा के ग्राम पंचायत नकटीखार में बांस बाड़ी के पीछे और मेडिकल कॉलेज झगरहा के सामने, 23 लाख 55 हजार 625 रुपये की लागत से वर्ष 2024-25 में तालाब निर्माण का कार्य स्वीकृत किया गया था।कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़

समाचारों के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली है कि इन तालाबों में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। कंवर ने आरोप लगाया है कि नकटीखार में एक पूर्व निर्मित नाले का उपयोग करते हुए उसे तालाब में तब्दील कर दिया गया, जिस पर बमुश्किल 5 से 6 लाख रुपये खर्च किए गए होंगे, और शेष राशि की बंदरबांट कर ली गई है।कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़

सभापति ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि कोरबा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में स्वीकृत व निर्मित तालाबों के भ्रष्टाचार के संबंध में एक पृथक टीम से यथोचित जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच के पूरे तथ्य उन्हें अवगत कराए जाएं और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़

आगे की राह

यह मामला अब सिर्फ तालाब निर्माण में धांधली का नहीं रह गया है, बल्कि इसमें जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने और अधिकारियों द्वारा अपने मातहतों को बचाने की कोशिशों के आरोप भी जुड़ गए हैं। सोमवार, 22 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी, जब यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है। क्या वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस ‘लीपापोती’ के आरोपों का खंडन कर पाएंगे और क्या रेंजर मृत्युंजय शर्मा के कार्यकाल की गहन जांच होगी, यह आने वाला समय बताएगा। इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई ही जनता के विश्वास को बहाल कर पाएगी।कोरबा में कैंपा मद तालाब घोटाले में नया मोड़

Dr. Tarachand Chandrakar

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