छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी: एक गंभीर संकट

बिल्डिंग और अहाता की कमी
छत्तीसगढ़ के प्राइमरी स्कूलों में हालात चिंताजनक हैं। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, 509 स्कूलों के पास कोई बिल्डिंग नहीं है। जहां बिल्डिंग मौजूद है, वहां 10,000 से अधिक स्थानों पर अहाता नहीं है। इसके अलावा, 7,000 प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं जिनमें बिजली का कनेक्शन तक नहीं है। इस स्थिति के बीच, राज्य सरकार यह दावा करती है कि वह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को देश में रोल मॉडल बनाएगी। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी: एक गंभीर संकट
आंकड़ों की हकीकत
छत्तीसगढ़ में प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक 48,548 स्कूल हैं। इनमें से कोई भी श्रेणी ऐसी नहीं है जहां सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों।
- पूर्व माध्यमिक स्कूल: 13,111 स्कूलों में से 131 के पास बिल्डिंग नहीं है, 3,433 के अहाते नहीं हैं, और 2,144 में बिजली नहीं है।
- हाई स्कूल: 1,881 स्कूलों में से 154 के पास बिल्डिंग नहीं है, 751 में अहाता नहीं है, और 637 स्कूलों में बिजली नहीं है।
- हायर सेकेंडरी स्कूल: 2,858 स्कूलों में 83 स्कूलों के पास भवन नहीं है, 297 स्कूलों के अहाते नहीं हैं, और 182 स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं है।
इन आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 10,798 स्कूलों में बिजली की कमी है, जिसमें प्राइमरी, मिडिल, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी: एक गंभीर संकट
स्मार्ट क्लास और तकनीकी शिक्षा की जमीनी हकीकत
सरकार के दावों के विपरीत, स्कूलों में स्मार्ट क्लास और कम्प्यूटर शिक्षा देने की योजनाएँ जमीनी स्तर पर बहुत कमजोर साबित हो रही हैं। केंद्र सरकार के सूचना और संचार प्रौद्योगिकी योजना के तहत, 1,246 कम्प्यूटर लैब लगाने की योजना बनी थी, लेकिन यह योजनाएँ अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी: एक गंभीर संकट
शौचालयों की स्थिति
सरकार के आंकड़े यह बताते हैं कि प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक 877 स्कूलों के पास भवन नहीं है, जबकि सरकारी दावा है कि प्रदेश में ऐसा कोई सरकारी स्कूल नहीं है जहां पानी या शौचालय नहीं हो। जब भवन नहीं है, तो शौचालय कहां बने होंगे, यह एक बड़ा प्रश्न है। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी: एक गंभीर संकट
शिक्षकों के रिक्त पद
शिक्षकों की कमी भी एक गंभीर समस्या है।
- प्राचार्य के 4,690 स्वीकृत पदों में से 3,528 खाली हैं।
- व्याख्याताओं के 46,059 पदों में से 8,314 खाली हैं।
- प्रधान पाठक के 12,449 पदों में से 3,725 खाली हैं।
- सहायक शिक्षकों के 79,759 पदों में से 23,943 रिक्त हैं। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी: एक गंभीर संकट



















