छत्तीसगढ़ में वन विभाग का नया विवाद! DFO की नई मांग से रेंजरों में असमंजस

ई-कुबेर से सीधा भुगतान, फिर भी रेंजरों से मंथली अकाउंट की मांग क्यों?
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन विभाग में एक नई उलझन खड़ी हो गई है। मजदूरों के वेतन का सीधा भुगतान ई-कुबेर प्रणाली के तहत उनके बैंक खातों में हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) रेंजरों से मासिक लेखा (Monthly Account) की मांग कर रहे हैं। इस फैसले ने पूरे विभाग में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। छत्तीसगढ़ में वन विभाग का नया विवाद! DFO की नई मांग से रेंजरों में असमंजस
ई-कुबेर से कैसे होता है भुगतान?
✅ DFO सीधे SBI को चेक जारी करते हैं।
✅ बैंक मजदूरों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर करता है।
✅ रेंजरों की इस प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं रहती।
इसके बावजूद रेंजरों से मासिक लेखा मांगे जाने से कर्मचारियों में सवाल उठ रहे हैं कि जब पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल है, तो अतिरिक्त कागजी कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ रही है? छत्तीसगढ़ में वन विभाग का नया विवाद! DFO की नई मांग से रेंजरों में असमंजस
PCCF रायपुर की चुप्पी पर सवाल
वन विभाग के शीर्ष अधिकारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) रायपुर इस मुद्दे पर मौन हैं। जब सरकार ने ई-कुबेर के माध्यम से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) लागू किया है, तो फिर मंथली अकाउंट की मांग का क्या औचित्य है? छत्तीसगढ़ में वन विभाग का नया विवाद! DFO की नई मांग से रेंजरों में असमंजस
क्या प्रशासनिक लापरवाही या दबाव की रणनीति?
इस नई व्यवस्था से विभागीय कर्मचारियों में शंका और नाराजगी बढ़ रही है। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने की रणनीति? वन विभाग के अधिकारी इस पर जल्द ही स्पष्टीकरण जारी कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ में वन विभाग का नया विवाद! DFO की नई मांग से रेंजरों में असमंजस
शीर्ष अधिकारियों से समाधान की मांग
रेंजरों और कर्मचारियों ने इस मुद्दे पर शीर्ष अधिकारियों से जवाब मांगा है। अगर ई-कुबेर में कोई गड़बड़ी नहीं है, तो मंथली अकाउंट मांगने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए। अब देखना होगा कि क्या वन विभाग इस पर कोई कार्रवाई करेगा या मामला यूं ही दबा रहेगा। छत्तीसगढ़ में वन विभाग का नया विवाद! DFO की नई मांग से रेंजरों में असमंजस









