‘लड़के भी होते हैं यौन शोषण का शिकार,’ दिल्ली कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, नाबालिग से कुकर्म पर 15 साल की सजा

नई दिल्ली: ‘लड़के भी होते हैं यौन शोषण का शिकार,’ दिल्ली कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, दिल्ली की साकेत कोर्ट ने एक नाबालिग लड़के के साथ यौन शोषण के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए समाज में व्याप्त एक बड़ी भ्रांति को तोड़ा है। अदालत ने आरोपी को 15 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि लड़के भी लड़कियों की तरह ही यौन शोषण के प्रति संवेदनशील होते हैं और कानून उन्हें भी बराबर सुरक्षा प्रदान करता है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2019 का है, जब एक व्यक्ति ने एक नाबालिग लड़के के साथ कुकर्म किया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए साकेत कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) अनु अग्रवाल ने 31 जुलाई को अपना अंतिम आदेश सुनाया। उन्होंने आरोपी को पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध) के तहत दोषी ठहराया।’लड़के भी होते हैं यौन शोषण का शिकार,’ दिल्ली कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
अदालत की समाज को आईना दिखाती टिप्पणी
न्यायाधीश अनु अग्रवाल ने अपने फैसले में सिर्फ सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा:
“यह एक भ्रम है कि यौन हमला केवल लड़कियों पर ही हो सकता है। लड़के भी लड़कियों की तरह ही यौन शोषण के प्रति संवेदनशील होते हैं।”
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता। यह 18 वर्ष से कम आयु के हर बच्चे को, चाहे वह लड़का हो या लड़की, यौन उत्पीड़न के अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है।’लड़के भी होते हैं यौन शोषण का शिकार,’ दिल्ली कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सरकारी आंकड़ों ने भी खोली आंखें
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील (APP) अरुण के.वी. ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट के अनुसार, देश में बाल यौन उत्पीड़न के लगभग 54.68% शिकार लड़के हैं। इस आंकड़े ने इस तथ्य को और मजबूती दी कि लड़कों का यौन शोषण एक गंभीर और अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है।’लड़के भी होते हैं यौन शोषण का शिकार,’ दिल्ली कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
अदालत ने माना कि यौन शोषण का शिकार हुए लड़के भी उसी मानसिक पीड़ा और तनाव से गुजरते हैं, जिससे कोई भी अन्य पीड़ित गुजरता है। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि सामाजिक ढांचे और शर्मिंदगी के कारण लड़के अक्सर इस तरह की घटनाओं के बारे में चुप रह जाते हैं, जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। यह फैसला इस चुप्पी को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।’लड़के भी होते हैं यौन शोषण का शिकार,’ दिल्ली कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला



















