बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ धान खरीदी में करोड़ों का ‘खेल’? 2500 की मशीन 10 हजार में खरीदने का दबाव!

बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ धान खरीदी में करोड़ों का ‘खेल’? 2500 की मशीन 10 हजार में खरीदने का दबाव! छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन के गलियारों में धान खरीदी शुरू होते ही एक बड़े भ्रष्टाचार की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अपेक्स बैंक (Apex Bank) के भीतर चल रही गतिविधियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बैंक के शीर्ष अधिकारी अपनी ‘जेब गर्म’ करने के लिए सरकारी खजाने और सोसायटियों पर जबरन बोझ डाल रहे हैं। मामला 2,739 धान उपार्जन केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों की खरीदी से जुड़ा है।
बाजार से 4 गुना ज्यादा दाम पर खरीदी की जिद क्यों?
सूत्रों के मुताबिक, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी (अध्यक्ष) श्री केदारनाथ गुप्ता पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे एक निजी फर्म ‘डिजीटेक सिस्टम्स’ (मालिक कमल कुमार, रायपुर) को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख रहे हैं।बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ धान खरीदी में करोड़ों का ‘खेल’?
हैरानी की बात यह है कि जिस इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन की कीमत खुले बाजार में महज ₹2,500 से ₹4,000 के बीच है, उसे सोसायटियों को ₹10,000 या उससे अधिक में खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। गणित सीधा है— प्रति मशीन करीब ₹6,000 से ₹7,500 का मोटा ‘मार्जिन’ निकाला जा रहा है। यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है, यह जांच का विषय है।बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ धान खरीदी में करोड़ों का ‘खेल’?
व्हाट्सएप कॉल पर ‘साहब’ का सीधा फरमान
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू अधिकारियों का कार्य करने का तरीका है। जानकारी निकलकर सामने आ रही है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के सीईओ (CEO) को सीधे व्हाट्सएप कॉल के जरिए निर्देश दिए जा रहे हैं।बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ धान खरीदी में करोड़ों का ‘खेल’?
आरोप है कि अध्यक्ष श्री गुप्ता खुद अफसरों को कॉल कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि डिजीटेक सिस्टम्स को ऑर्डर दिया गया या नहीं। उधर, वेंडर कमल कुमार भी अध्यक्ष के नाम का हवाला देकर अधिकारियों पर आधिकारिक ऑर्डर जारी करने का दबाव बना रहे हैं। नौकरी जाने के डर से कई अधिकारी इस मौखिक और अनौपचारिक आदेश का पालन करने को मजबूर हो गए हैं।बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ धान खरीदी में करोड़ों का ‘खेल’?
कमीशन के चक्कर में रोकी गई सेंट्रलाइज्ड खरीदी!
इस खेल की पटकथा पहले ही लिख दी गई थी। पहले योजना थी कि प्रदेश की 2,058 समितियों के 2,739 केंद्रों के लिए तौल मशीन, पॉलीथिन, कैप कवर, सुतली और सीसीटीवी जैसे सामानों की खरीदी ‘सेंट्रलाइज्ड’ (केंद्रीकृत) तरीके से होगी।बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ धान खरीदी में करोड़ों का ‘खेल’?
लेकिन, सूत्रों का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया और कमीशन की ‘सेटिंग’ में देरी होने के कारण उस प्रक्रिया को रोक दिया गया। अब जब धान खरीदी सिर पर है, तो हड़बड़ी का फायदा उठाकर मनमानी कीमत पर एक ही फर्म को काम सौंपने का दबाव बनाया जा रहा है।बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ धान खरीदी में करोड़ों का ‘खेल’?
अधिकारियों की चुप्पी पर उठते सवाल
इस पूरे प्रकरण में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के प्रबंध संचालक श्री कमल नारायण कांडे की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। जानकारों का कहना है कि उनकी मौन स्वीकृति के बिना इतना बड़ा खेल संभव नहीं है। अब देखना यह होगा कि धान खरीदी संपन्न होने के बाद क्या इन अधिकारियों को कोई नया ‘कलेक्शन टारगेट’ दिया जाता है या फिर सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी।बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ धान खरीदी में करोड़ों का ‘खेल’?









