पहाड़ों का सीना चीरकर बिछा दी ‘मौत की सड़क’, Google Map के भरोसे जान जोखिम में डाल रहे पर्यटक!

पहाड़ों का सीना चीरकर बिछा दी ‘मौत की सड़क’, Google Map के भरोसे जान जोखिम में डाल रहे पर्यटक! राजस्थान के उदयपुर-नाथद्वारा मार्ग की खूबसूरत वादियां अब भू-माफियाओं और प्रशासनिक लापरवाही के कारण ‘मौत के जाल’ में बदलती जा रही हैं। प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर यहां अवैध रूप से सीमेंट और डामर की ऐसी सड़कें बिछा दी गई हैं, जो न केवल पर्यावरण के लिए खतरा हैं, बल्कि पर्यटकों को सीधे मौत के मुहाने तक ले जा रही हैं।
पहाड़ काटकर बना दिया अवैध रास्तों का जाल
उदयपुर के चीरवा घाटे से आगे ‘सरे’ और ‘सरेखुर्द’ गांवों में भू-माफियाओं ने बुलडोजर चलाकर पहाड़ों को छलनी कर दिया है। यहां बिना किसी सरकारी मंजूरी के सीमेंट और डामर के सर्पिलाकार (टेढ़े-मेढ़े) रास्ते बना दिए गए हैं। ये रास्ते इतने खतरनाक और दुर्गम हैं कि अगर गाड़ी जरा भी फिसली, तो जान बचना मुश्किल है।पहाड़ों का सीना चीरकर बिछा दी ‘मौत की सड़क’
हैरानी की बात यह है कि ये अवैध रास्ते गूगल मैप (Google Map) पर भी दिखाई दे रहे हैं। अनजान पर्यटक मैप के भरोसे इन खतरनाक रास्तों से होते हुए रिसॉर्ट और विला तक पहुँचने की कोशिश करते हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है।पहाड़ों का सीना चीरकर बिछा दी ‘मौत की सड़क’
‘लेक व्यू’ के लालच में सुखा दिए जलस्रोत
भू-माफियाओं ने सिर्फ पहाड़ ही नहीं काटे, बल्कि पानी के रास्तों को भी रोक दिया है।
400 फीट ऊंचाई पर प्लॉट: हाईवे से करीब 300 से 400 फीट की ऊंचाई पर विला और प्लॉटिंग का खेल चल रहा है।
व्यू का खेल: इन ऊंचे स्थानों से एकलिंगजी का ‘बाघेला तालाब’ और अन्य जलस्रोत साफ दिखाई देते हैं। इसी ‘लेक व्यू’ (Lake View) को बेचने के लालच में पहाड़ों की अंधाधुंध खुदाई की गई।
संकट में तालाब: रास्तों और प्लॉट की कटिंग के दौरान मलबे से तालाबों के कैचमेंट एरिया (पानी आने का रास्ता) को ब्लॉक कर दिया गया है, जिससे भविष्य में जलस्रोतों के सूखने का खतरा पैदा हो गया है।
नियम-कायदे सिर्फ कागजों में, जिम्मेदार खामोश
हाईकोर्ट के आदेश, राजस्थान सरकार की ‘हिल पॉलिसी’ और झील संरक्षण के तमाम नियम यहाँ धूल फांक रहे हैं। जब इस अवैध निर्माण और रास्तों की मंजूरी (Permission) के बारे में सवाल किया गया, तो अधिकांश जिम्मेदार अधिकारियों ने चुप्पी साध ली।पहाड़ों का सीना चीरकर बिछा दी ‘मौत की सड़क’
पड़ताल में सामने आया है कि कई रास्ते भू-माफियाओं ने अपनी मर्जी से बना लिए हैं। वहीं, कुछ मामलों में पंचायत स्तर से नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण पास करवा लिए गए। बड़गांव क्षेत्र में रहे कुछ तत्कालीन अधिकारियों द्वारा आनन-फानन में दी गई स्वीकृतियां भी संदेह के घेरे में हैं।पहाड़ों का सीना चीरकर बिछा दी ‘मौत की सड़क’
प्रकृति और सुरक्षा दोनों दांव पर
यह पूरा खेल प्रशासन और माफिया के गठजोड़ की ओर इशारा करता है। सरकारी जमीन पर कब्जा हो रहा है, पहाड़ काटे जा रहे हैं और पर्यटकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन इसे रोकने वाला कोई नहीं है।पहाड़ों का सीना चीरकर बिछा दी ‘मौत की सड़क’



















