सरगुजा जिले के सीतापुर से सामने आई एक हृदयविदारक तस्वीर ने विकास के दावों की पोल खोल दी है। यहाँ पहुँचविहीन क्षेत्र में सड़क न होने के कारण एक आदिवासी युवक के शव को परिजन खाट की कांवड़ बनाकर कई किलोमीटर पैदल ले जाने को मजबूर हुए।
पहुँचविहीन गाँव और विकास की कड़वी सच्चाई
सीतापुर: सड़क के अभाव में सिस्टम ने तोड़ा दम, खाट पर शव ढोने को मजबूर हुए ग्रामीण, सरगुजा जिले का सीतापुर विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण चर्चा में है। ताजा मामला ग्राम पंचायत भरतपुर-लकरालता का है, जहाँ पहुँच मार्ग न होने की वजह से सरकारी तंत्र की विफलता साफ नजर आई। यहाँ एक युवक की मृत्यु के बाद उसे सम्मानजनक विदाई तक नसीब नहीं हुई, क्योंकि गाँव तक शव वाहन पहुँचने का कोई रास्ता ही नहीं था।
तालाब में डूबने से हुई थी युवक की मौत
सीतापुर: सड़क के अभाव में सिस्टम ने तोड़ा दममिली जानकारी के अनुसार, लकरालता निवासी 31 वर्षीय आदिवासी युवक सुरेंद्र तिर्की की 31 दिसंबर को तालाब में डूबने से मृत्यु हो गई थी। शव बरामद होने के बाद परिजनों ने एम्बुलेंस और शव वाहन के लिए संपर्क किया, लेकिन ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम रास्तों की वजह से वाहन गाँव के भीतर नहीं आ सका।
मजबूरी की कांवड़: कई किलोमीटर पैदल चले परिजन
सीतापुर: सड़क के अभाव में सिस्टम ने तोड़ा दमजब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो बेबस परिजनों ने लकड़ी और खाट (चारपाई) के सहारे एक अस्थायी कांवड़ बनाई। युवक के शव को उस पर रखकर ग्रामीण और परिजन घंटों तक ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुँचे। यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, जो क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली को बयां कर रहा है।
बरसों से सड़क की बाट जोह रहे ग्रामीण
सीतापुर: सड़क के अभाव में सिस्टम ने तोड़ा दमलकरालता और आसपास के इलाकों में रहने वाले ग्रामीण लंबे समय से पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन उनकी बुनियादी समस्या जस की तस बनी हुई है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब मरीज को अस्पताल ले जाना हो या किसी का अंतिम संस्कार करना हो।
विधायक रामकुमार टोप्पो का आश्वासन
सीतापुर: सड़क के अभाव में सिस्टम ने तोड़ा दमइस दुखद घटना पर स्थानीय विधायक रामकुमार टोप्पो ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “इस सड़क का भूमि पूजन पहले ही किया जा चुका है। बरसात के कारण काम शुरू नहीं हो सका था, लेकिन जनवरी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। यह घटना अत्यंत दुखद है। विष्णु देव साय सरकार में सीतापुर की सभी सड़कों का कायाकल्प किया जा रहा है और जल्द ही लोगों को ऐसी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।”
प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल
सीतापुर: सड़क के अभाव में सिस्टम ने तोड़ा दमभले ही वादे और आश्वासन दिए जा रहे हों, लेकिन इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
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आजादी के इतने वर्षों बाद भी गाँव मुख्य धारा से क्यों नहीं जुड़ पाए?
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क्या पहुँचविहीन क्षेत्रों के लिए प्रशासन के पास कोई वैकल्पिक योजना नहीं है?
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क्या केवल कागजों पर विकास हो रहा है?
सीतापुर: सड़क के अभाव में सिस्टम ने तोड़ा दमसीतापुर की यह तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि दूरस्थ अंचलों में आज भी “सड़क” किसी विलासिता से कम नहीं है।