LIVE UPDATE
अपराधरायपुर

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED का बड़ा एक्शन, पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास सहित 30 अधिकारियों की ₹38.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED का बड़ा एक्शन, पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास सहित 30 अधिकारियों की ₹38.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क, छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। ED ने पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास और 30 अन्य अधिकारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए उनकी लगभग 38.21 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: इस घोटाले से राज्य सरकार के खजाने को 2,800 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।

WhatsApp Group Join Now
Facebook Page Follow Now
YouTube Channel Subscribe Now
Telegram Group Follow Now
Instagram Follow Now
Dailyhunt Join Now
Google News Follow Us!

ED की बड़ी कार्रवाई: 38 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर आंचलिक कार्यालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत यह कार्रवाई की गई है। कुर्क की गई संपत्तियों का विवरण इस प्रकार है:

  • 78 अचल संपत्तियां (मूल्य ₹21.64 करोड़): इसमें आलीशान बंगले, प्रीमियम आवासीय परिसरों में फ्लैट, कमर्शियल दुकानें और बड़े पैमाने पर कृषि भूमि शामिल है।

  • 197 चल संपत्तियां (मूल्य ₹16.56 करोड़): इसमें बैंक खातों में जमा राशि, हाई-वैल्यू फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), जीवन बीमा पॉलिसियां और शेयर बाजार व म्यूचुअल फंड का पोर्टफोलियो शामिल है।

शराब घोटाले का मॉडल: ‘पार्ट-बी’ स्कीम से हुआ भ्रष्टाचार

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वरिष्ठ नौकरशाहों और प्रभावशाली राजनेताओं के एक सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग पर पूरी तरह कब्जा कर लिया था।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के तत्कालीन सीईओ अरुण पति त्रिपाठी ने सरकारी तंत्र के समानांतर एक अवैध प्रणाली चलाई। इस सिंडिकेट ने सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से अवैध ‘देसी शराब’ बेचने के लिए “पार्ट-बी” योजना बनाई थी।

नकली होलोग्राम और अवैध बिक्री का खेल

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: घोटाले को अंजाम देने के लिए नकली होलोग्राम और गैर-कानूनी बोतलों का इस्तेमाल किया गया। इस शराब को सरकारी गोदामों में भेजने के बजाय सीधे भट्टियों से दुकानों तक पहुँचाया जाता था। सरकारी रिकॉर्ड में इस शराब का कोई हिसाब नहीं होता था, जिससे राज्य को मिलने वाला राजस्व सीधे सिंडिकेट की जेब में जा रहा था।

प्रति केस 140 रुपये का कमीशन: भ्रष्टाचार की परतें

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: जांच में यह भी पुख्ता हुआ है कि आबकारी विभाग के अधिकारियों को उनके क्षेत्र में अवैध शराब बेचने की अनुमति देने के बदले 140 रुपये प्रति केस का निश्चित कमीशन मिलता था।

  • पूर्व आयुक्त निरंजन दास ने इस घोटाले से अकेले 18 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की।

  • रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें इस अवैध नेटवर्क को संरक्षण देने के लिए हर महीने 50 लाख रुपये की रिश्वत दी जाती थी।

  • कुल 31 आबकारी अधिकारियों ने मिलकर करीब 89.56 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार किया।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी घेरा

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED ने यह जांच रायपुर स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। पुलिस और ED की संयुक्त जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इस सिंडिकेट ने न केवल कानून का उल्लंघन किया, बल्कि सरकारी खजाने को भारी क्षति पहुँचाकर निजी लाभ कमाया। वर्तमान में की गई संपत्तियों की कुर्की इसी जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Pooja Chandrakar

देश में तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार वेबसाइट है। जो हिंदी न्यूज साइटों में सबसे अधिक विश्वसनीय, प्रमाणिक और निष्पक्ष समाचार अपने पाठक वर्ग तक पहुंचाती है। इसकी प्रतिबद्ध ऑनलाइन संपादकीय टीम हर रोज विशेष और विस्तृत कंटेंट देती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP Radio
WP Radio
OFFLINE LIVE