
बीजापुर में स्कूली छात्राओं के गर्भवती होने का मामला: प्रशासन और विपक्ष के बीच छिड़ा आरोप-प्रत्यारोप का दौर,छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। संवेदनशील क्षेत्र गंगालूर में तीन स्कूली छात्राओं के गर्भवती होने की खबर ने न केवल प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। इस मामले के उजागर होने के बाद अब आवासीय विद्यालयों की सुरक्षा और प्रबंधन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
मामले का खुलासा: 5 माह की गर्भवती मिलीं छात्राएं
बीजापुर में स्कूली छात्राओं के गर्भवती होने का मामला:जानकारी के अनुसार, प्रभावित छात्राओं में दो छात्राएं 12वीं कक्षा की और एक 11वीं की छात्रा है। हाल ही में इन छात्राओं ने वार्षिक परीक्षाओं में भाग लिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, ये छात्राएं लगभग 5 महीने की गर्भवती हैं और स्वास्थ्य विभाग ने इनके प्रसव से संबंधित स्वास्थ्य कार्ड (ANC Card) भी जारी कर दिए हैं। शुरुआती चर्चाओं में इन छात्राओं के ‘पोटाकेबिन’ (आवासीय विद्यालय) में रहने की बात कही जा रही थी, जिसे लेकर विवाद गहरा गया है।
जिला प्रशासन की सफाई: पोटाकेबिन के दावों को नकारा
बीजापुर में स्कूली छात्राओं के गर्भवती होने का मामला:मामले की गंभीरता को देखते हुए बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि ये छात्राएं घर से रहकर परीक्षा दे रही थीं। कलेक्टर के अनुसार, 11वीं की एक छात्रा गंगालूर पोटाकेबिन से संबंधित जरूर थी, लेकिन वह पिछले साल अक्टूबर से ही स्कूल से अनुपस्थित है। प्रशासन का कहना है कि छात्राएं किसी आवासीय छात्रावास में रहकर पढ़ाई नहीं कर रही थीं, इसलिए छात्रावास अधीक्षिका पर तत्काल कार्रवाई का आधार नहीं बनता। फिलहाल, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।
हॉस्टल प्रबंधन और सुरक्षा पर उठते सवाल
बीजापुर में स्कूली छात्राओं के गर्भवती होने का मामला:प्रशासनिक दावों के विपरीत, कुछ सूत्रों का कहना है कि छात्राओं को गर्भवती पाए जाने के बाद छात्रावास से निकाला गया है। इस घटना ने छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली की पोल खोल दी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि छात्राएं छात्रावास में रह रही थीं, तो प्रबंधन को उनके स्वास्थ्य की इतनी बड़ी जानकारी क्यों नहीं मिली? पुलिस भी इस मामले में सक्रिय हो गई है और गंगालूर पोटाकेबिन में पूछताछ की खबरें आ रही हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर पुलिस के आला अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका है।
शिक्षा विभाग का पक्ष: छात्राएं छात्रावास की निवासी नहीं थीं
बीजापुर के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि जांच में पाया गया है कि संबंधित छात्राएं पोटाकेबिन हाईस्कूल के छात्रावास में नहीं रह रही थीं। वे गैर-आवासीय विद्यालयों की छात्राएं थीं। विभाग ने स्पष्ट किया कि जो छात्रा छात्रावास में नामांकित थी, वह पिछले पांच महीनों से स्कूल नहीं आ रही थी, और उसे स्कूल प्रबंधन द्वारा निकाला नहीं गया था।
सियासी पारा गरम: कांग्रेस ने बनाई जांच कमेटी
इस संवेदनशील मुद्दे पर छत्तीसगढ़ की राजनीति भी गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के शासनकाल में आदिवासी बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। कांग्रेस ने इस मामले की जमीनी हकीकत जानने के लिए एक विशेष ‘जांच कमेटी’ का गठन किया है, जो अपनी रिपोर्ट पार्टी को सौंपेगी। बैज ने पूर्व की झलियामारी जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए वर्तमान प्रशासन पर सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाया है।
बीजापुर की यह घटना शिक्षा विभाग और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। क्या प्रशासन की जांच में सच्चाई सामने आएगी या यह मामला राजनीतिक रस्साकशी की भेंट चढ़ जाएगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल, स्थानीय लोगों में असुरक्षा और नाराजगी का माहौल है।



















