
सावधान! छत्तीसगढ़ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ: साइबर अपराधियों ने अब लोगों को मानसिक रूप से बंधक बनाकर ठगने का नया तरीका ‘डिजिटल अरेस्ट’ अपना लिया है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर (गांधीनगर) में एक महिला शिक्षिका इस शातिर ठगी का शिकार हुई हैं। अपराधियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर शिक्षिका को इतना डराया कि उन्होंने डर के मारे 4.50 लाख रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।
क्राइम ब्रांच का डर दिखाकर बिछाया जाल
यह मामला 19 मार्च को शुरू हुआ जब शिक्षिका परीक्षा ड्यूटी खत्म कर घर लौटी थीं। उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को रायपुर क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। ठग ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने गूगल पर अश्लील और प्रतिबंधित सामग्री देखी है, जिसके लिए उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ कर मानसिक दबाव बनाया
सावधान! छत्तीसगढ़ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ: ठगों ने शिक्षिका को डराने के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ का सहारा लिया। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि वे न तो फोन काटें और न ही इस बारे में किसी को जानकारी दें, वरना पुलिस उनके घर पहुंच जाएगी। घबराहट में शिक्षिका ने ठगों की हर बात माननी शुरू कर दी। आरोपियों ने केस रफा-दफा करने और ‘सिक्योरिटी मनी’ के नाम पर पैसों की मांग की और वादा किया कि जांच के बाद यह राशि वापस कर दी जाएगी।
6 दिनों में किस्तों में वसूले लाखों रुपये
गिरफ्तारी के डर से डरी हुई शिक्षिका ने 19 मार्च से 25 मार्च के बीच विभिन्न यूपीआई (UPI) आईडी पर कुल 4,50,000 रुपये भेज दिए। ठगों ने बेहद चालाकी से छोटी-बड़ी किस्तों में पैसे मंगवाए:
19 मार्च: 1 लाख रुपये
20-22 मार्च: लगभग 1.75 लाख रुपये
24-25 मार्च: शेष राशि किस्तों में ट्रांसफर कराई गई।
जब 25 मार्च के बाद भी ठगों ने और पैसों की मांग जारी रखी और पैसे वापस करने का झूठा आश्वासन दिया, तब शिक्षिका को संदेह हुआ। उन्होंने अपने सहकर्मियों को आपबीती सुनाई, जिसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू
सावधान! छत्तीसगढ़ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ: पीड़िता की शिकायत पर गांधीनगर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। साइबर सेल की मदद से उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को ट्रेस किया जा रहा है, जिनका उपयोग इस वारदात में हुआ है।
विशेषज्ञों की सलाह: साइबर ठगी से कैसे बचें?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई कानूनी प्रावधान भारत में नहीं है। यदि आपके पास भी ऐसा कोई कॉल आता है, तो इन बातों का ध्यान रखें:
कानूनी प्रक्रिया जानें: कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी (ED, CBI, Crime Branch) वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है।
घबराएं नहीं: यदि कोई आपको डराता है, तो तुरंत फोन काटें और अपने परिवार या स्थानीय पुलिस को सूचित करें।
हेल्पलाइन नंबर: किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
आपकी सतर्कता ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर न करें।



















