
पेट्रोल-डीजल ड्यूटी में कटौती:केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में की गई कटौती का असर अब सरकारी राजस्व पर दिखने लगा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस फैसले से सरकार को हर 15 दिन में लगभग 5500 करोड़ रुपये का शुद्ध राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने इस वित्तीय झटके की पुष्टि की है।
राजस्व घाटे का पूरा गणित: एक्साइज ड्यूटी बनाम विंडफॉल टैक्स
पेट्रोल-डीजल ड्यूटी में कटौती:सरकार ने 26 मार्च को आम जनता और अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी।
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कुल नुकसान: इस कटौती से हर 15 दिन (पखवाड़े) में सरकार को करीब 7000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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भरपाई की कोशिश: इस घाटे को कम करने के लिए सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया है।
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नेट घाटा: विंडफॉल टैक्स से हर 15 दिन में करीब 1500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हो रही है, लेकिन इसके बावजूद सरकार को नेट 5500 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है।
सालाना 1.43 लाख करोड़ रुपये के झटके की आशंका
पेट्रोल-डीजल ड्यूटी में कटौती:विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टैक्स की यही व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 तक जारी रहती है, तो सालाना आधार पर सरकारी खजाने को 1.43 लाख करोड़ रुपये की भारी चपत लग सकती है। इससे पहले अनुमान लगाया गया था कि टैक्स में बदलाव के कारण यह नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है।
मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल की कीमतों का दबाव
एक्साइज ड्यूटी में कटौती का यह फैसला वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं।
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तेल कंपनियों का घाटा: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को पेट्रोल पर ₹26 और डीजल पर ₹81.90 प्रति लीटर तक की अंडर-रिकवरी (घाटा) हो रही है।
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दैनिक नुकसान: कंपनियां रोजाना लगभग 2400 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं।
उपभोक्ताओं को राहत या कंपनियों को सहारा?
पेट्रोल-डीजल ड्यूटी में कटौती:तेल मंत्रालय के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी में की गई इस कटौती का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखना है। हालांकि इसका सीधा फायदा पंप पर कीमतों में कमी के रूप में नहीं दिख रहा, लेकिन यह कदम तेल कंपनियों के भारी घाटे को कम करने के लिए उठाया गया है ताकि देश में ईंधन की सप्लाई सुचारू रूप से बनी रहे।
निर्यात पर लगाम और घरेलू उपलब्धता पर जोर
पेट्रोल-डीजल ड्यूटी में कटौती:सरकार ने 27 मार्च से डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और जेट फ्यूल पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लागू किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेल कंपनियां अधिक मुनाफे के चक्कर में ईंधन का निर्यात न करें और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी न हो।
सरकार हर 15 दिन में वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की कीमतों की समीक्षा कर रही है। आने वाले समय में बाजार के हालातों को देखते हुए टैक्स स्ट्रक्चर में और भी बदलाव किए जा सकते हैं।








