
Opium Farming Case:छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा गांव से एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर सामने आया है। अफीम की अवैध खेती का खुलासा करने वाले गांव के सरपंच अरुण गौतम को अब खुद अपने पद से हाथ धोना पड़ा है। एसडीएम कोर्ट (SDM Court) ने चुनावी हलफनामे में आपराधिक जानकारी छिपाने को गंभीर माना और उनके चुनाव को निरस्त करने का आदेश सुनाया।
अफीम की खेती और आपसी विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला तब सुर्खियों में आया था जब अरुण गौतम ने विनायक ताम्रकार के खेत में अफीम की खेती होने की शिकायत पुलिस से की थी। इस शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और विनायक ताम्रकार की गिरफ्तारी हुई थी। हालांकि, इसके बाद विनायक ताम्रकार की ओर से भी गौतम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें उनके चुनावी हलफनामे पर सवाल उठाए गए।
हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप
पंचायत चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं प्रत्याशी भुवनेश्वरी देशमुख ने इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में दावा किया गया कि:
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अरुण गौतम ने चुनाव के दौरान अपने विरुद्ध दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी आयोग को नहीं दी थी।
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जांच में पाया गया कि उनके खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) सहित अन्य संगीन मामले पहले से लंबित थे।
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शुरुआत में आपत्तियां खारिज होने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जिसके निर्देश पर एसडीएम कोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई।
एसडीएम कोर्ट का बड़ा फैसला: उपचुनाव के आदेश
Opium Farming Case:एसडीएम कोर्ट ने दस्तावेजों की जांच के बाद अरुण गौतम के निर्वाचन को शून्य (Void) घोषित कर दिया। कोर्ट के मुख्य आदेश इस प्रकार हैं:
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पद रिक्त घोषित: समोदा गांव के सरपंच का पद तत्काल प्रभाव से रिक्त कर दिया गया है।
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उपचुनाव की तैयारी: दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ को राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है ताकि गांव में दोबारा चुनाव कराए जा सकें।
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विजेता घोषित करने से इनकार: कोर्ट ने याचिकाकर्ता भुवनेश्वरी देशमुख को सीधे विजेता घोषित करने की मांग ठुकरा दी, क्योंकि चुनाव में वोटों का अंतर काफी अधिक था।
अब समोदा गांव की जनता को एक बार फिर अपना नया सरपंच चुनने के लिए मतदान केंद्र तक जाना होगा।
यह आर्टिकल स्थानीय प्रशासनिक रिपोर्टों और अदालती आदेशों के आधार पर तैयार किया गया है ताकि पाठकों तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुंच सके।
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