Pelma Coal Mine Protest: संजय देवांगन ने एसईसीएल की सार्वजनिक सुनवाई की आलोचना की

Pelma Coal Mine Protest: रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में 19 मई को होने वाली SECL पेलमा कोयला खदान की जनसुनवाई (Public Hearing) अब विवादों के घेरे में है। पूर्व वरिष्ठ पार्षद संजय देवांगन ने इस प्रोजेक्ट को “जनविरोधी” करार देते हुए प्रशासन और कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
Key Highlights of the Controversy
Pelma Coal Mine Protest: यहाँ उन मुख्य बिंदुओं (Main Points) का विवरण है जिन्हें लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो रहा है:
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Corporate Pressure vs. Public Interest: संजय देवांगन का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया केवल एक ‘औपचारिकता’ (formality) है। प्रशासन बड़े कॉर्पोरेट घरानों के दबाव में काम कर रहा है, जिससे हजारों ग्रामीणों के विस्थापन (displacement) का खतरा पैदा हो गया है।
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Violation of PESA Law: यह क्षेत्र अनुसूचित (Scheduled) क्षेत्र में आता है। देवांगन के अनुसार, PESA कानून के तहत ग्राम सभाओं की वास्तविक सहमति लेना अनिवार्य है, जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
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Environmental & Cultural Impact: “जल, जंगल, जमीन” की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि इस माइनिंग प्रोजेक्ट से न केवल Environment Balance बिगड़ेगा, बल्कि स्थानीय आदिवासी संस्कृति (Tribal Culture) को भी गहरा नुकसान होगा।
Major Demands (प्रमुख मांगें)
Pelma Coal Mine Protest: विपक्ष और स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
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Immediate Cancellation: 19 मई को होने वाली जनसुनवाई को तुरंत रद्द किया जाए।
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Transparent Consent: ग्राम सभाओं के साथ पारदर्शी तरीके से संवाद और सहमति सुनिश्चित हो।
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Re-evaluation: प्रोजेक्ट के सामाजिक (Social) और पर्यावरणीय (Environmental) प्रभावों का दोबारा मूल्यांकन (Impact Assessment) कराया जाए।
चेतावनी: क्षितिज पर जन आंदोलन
Pelma Coal Mine Protest: संजय देवांगन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने स्थानीय लोगों की भावनाओं को दरकिनार किया, तो कांग्रेस पार्टी और ग्रामीण मिलकर एक बड़ा लोकतांत्रिक आंदोलन (Mass Protest) करेंगे।
Expert Insight: रायगढ़ के कोयला बेल्ट में विस्थापन और पर्यावरण हमेशा से संवेदनशील मुद्दे रहे हैं। PESA कानून का उल्लंघन इस विवाद को कानूनी रूप से भी पेचीदा बना सकता है।









