
दंतेवाड़ा में रेत माफिया का तांडव:छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में इन दिनों रेत माफिया का राज चल रहा है। जिले के चारों विकासखंडों में अवैध खनन और परिवहन का काला कारोबार इस कदर हावी है कि अब प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठने लगे हैं। ताजा मामला गीदम ब्लॉक के बड़े तुमनार क्षेत्र का है, जहाँ ग्राम पंचायत को अंधेरे में रखकर डंकनी और शंखनी नदियों से धड़ल्ले से रेत निकाली जा रही है।
‘एक पीटपास, कई फेरे’: सरकारी खजाने को लग रहा चूना
रेत के इस अवैध कारोबार में भ्रष्टाचार का एक नया तरीका अपनाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, माफिया ‘एक पीटपास-कई फेरे’ के खेल के जरिए शासन को लाखों रुपये की राजस्व हानि पहुँचा रहे हैं। एक ही वैध दस्तावेज (पीटपास) दिखाकर कई बार गाड़ियों से रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है, जिससे खनिज विभाग को मिलने वाला टैक्स माफिया की जेब में जा रहा है।
खतरे में पुल और पर्यावरण: जंगलों पर भी प्रहार
खनन माफिया ने केवल नदी ही नहीं, बल्कि आसपास के जंगलों और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुँचाया है:
-
नष्ट होते पेड़: खनन के लिए बनाए गए रास्तों के कारण जंगल के सैकड़ों पेड़ मिट्टी में दबकर खत्म हो चुके हैं।
-
पुल को बड़ा खतरा: सरकारी नियमों के अनुसार पुल से 200 मीटर की दूरी तक खनन प्रतिबंधित है, लेकिन यहाँ पुल के मात्र 50 मीटर के भीतर मशीनों से खुदाई की जा रही है, जिससे पुल की मजबूती पर खतरा मंडरा रहा है।
-
वन विभाग की चुप्पी: वन और खनिज विभाग की निष्क्रियता ने इस अवैध धंधे को और हवा दी है।
व्यापारी के हाथ में माफिया की कमान?
दंतेवाड़ा में रेत माफिया का तांडव:स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस पूरे सिंडिकेट के पीछे गीदम का एक नामी व्यापारी सक्रिय है। आरोप है कि वह पर्दे के पीछे से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा है और प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर डंकनी-शंखनी नदी पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है।
स्थानीय जनता में भारी आक्रोश
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन केवल दिखावे के लिए छोटी-मोटी कार्रवाई करता है, जबकि माफियाओं के बड़े नेटवर्क पर हाथ डालने से बच रहा है। लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद ठोस एक्शन न होने से आम जनता अब सड़क पर उतरने को मजबूर है। लोगों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो और इस माफिया राज का अंत किया जाए।
दंतेवाड़ा में प्राकृतिक संसाधनों की लूट केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। क्या प्रशासन इस बार सख्त कदम उठाएगा या डंकनी-शंखनी नदी का सीना इसी तरह छलनी होता रहेगा? यह एक बड़ा सवाल है।








