चारामा NH-30 पर मवेशियों का जमावड़ा बरकरार, 20 मौतों के बाद भी नहीं बदले हालात

कांकेर के चारामा में नेशनल हाईवे-30 पर मवेशियों के सड़क पर बैठने से हादसों का खतरा बना हुआ है। हाल ही में 20 मवेशियों की मौत के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में चारामा नगर से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-30 इन दिनों एक गंभीर सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। यहां रात के समय सड़क पर बड़ी तादाद में मवेशी बैठे रहते हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

हाल ही में इसी हाईवे पर दो अलग-अलग हादसों में करीब 20 मवेशियों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखा। शनिवार रात से रविवार सुबह तक चारामा थाने के ठीक सामने हाईवे पर मवेशियों का जमावड़ा देखा गया, जिससे वाहन चालकों को बचकर निकलना पड़ा।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है और अब तक इसका कोई स्थायी हल नहीं निकाला गया है।

रात के अंधेरे में क्यों बढ़ जाता है खतरा
दिन के उजाले में वाहन चालक सड़क पर बैठे मवेशियों को दूर से देखकर सतर्क हो जाते हैं, लेकिन रात में हालात पूरी तरह बदल जाते हैं। अंधेरे में मवेशी वाहनों की हेडलाइट में देर से नजर आते हैं, जिससे चालकों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय बचता है।
- अचानक ब्रेक लगाने पर पीछे से आ रहे वाहनों की टक्कर का खतरा
- सड़क के बीचों-बीच मवेशियों के बैठने से दोनों तरफ से आ रहे वाहनों के लिए जगह कम पड़ना
- तेज रफ्तार वाहनों का मवेशियों से टकराना, जिससे मवेशियों की मौत या गंभीर चोट
यही वजह है कि रात में इस मार्ग से गुजरना वाहन चालकों के लिए किसी जोखिम भरे सफर से कम नहीं रह गया है।

हाल की घटना ने फिर खोली प्रशासनिक लापरवाही की पोल
बीते सप्ताहांत की बात करें तो शनिवार रात से रविवार सुबह तक चारामा थाने के सामने वाले हाईवे हिस्से पर मवेशियों की भारी मौजूदगी देखी गई। इस दौरान गुजर रहे वाहन चालक मवेशियों के बीच से रास्ता बनाते हुए दिखे।
यह घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यह ठीक उसी इलाके में हुई, जहां प्रशासनिक निगरानी सबसे ज्यादा होनी चाहिए। थाने के सामने ही अगर हाईवे पर मवेशियों का यह हाल है, तो बाकी हिस्सों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
दो हादसों में 20 मवेशियों की मौत, फिर भी सबक नहीं
कुछ दिन पहले ही एनएच-30 के अलग-अलग हिस्सों में हुए दो हादसों में करीब 20 मवेशी तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर मारे गए थे। वाहन चालकों की पहचान अब तक सामने नहीं आई है।
इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन और पशुपालक दोनों ही सतर्क होंगे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा जस का तस बना हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में इसी तरह की घटनाएं दोहराए जाने की आशंका है।
स्थानीय लोगों में बढ़ी नाराजगी, उठे सवाल
चारामा के निवासियों में इस मुद्दे को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि हादसा होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय प्रशासन को पहले ही ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए थी, जिससे मवेशी हाईवे तक न पहुंच पाएं।
लोगों का यह भी मानना है कि यह समस्या सिर्फ वाहन चालकों के लिए ही नहीं, बल्कि खुद मवेशियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रही है। बार-बार हो रही मौतों के बावजूद कोई ठोस कदम न उठाया जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
क्या बदलना चाहिए? स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के सामने कुछ स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- हाईवे पर नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाई जाए
- सड़क पर बैठे मवेशियों को तुरंत हटाने की व्यवस्था हो
- पशुपालकों को मवेशी खुले में छोड़ने से रोका जाए और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई हो
- हाईवे किनारे मवेशियों के बैठने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग या अन्य तकनीकी उपाय अपनाए जाएं
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्ययोजना सामने नहीं आई है। रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय लोग लगातार इस मुद्दे को प्रशासन के समक्ष उठा रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं दिखी है।
अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। एक ओर जहां वाहन चालकों और यात्रियों की सुरक्षा दांव पर है, वहीं दूसरी ओर बेजुबान मवेशियों की जान भी लगातार खतरे में बनी हुई है।









