दिल्ली में निर्माणाधीन इमारत गिरी: प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया रात 9 बजे के बाद क्या हुआ

दिल्ली में रात 9-9:30 बजे निर्माणाधीन इमारत ढही। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अंदर 3-4 लोग थे, राहत-बचाव जारी। कारण की जांच बाकी है।
दिल्ली में रात करीब 9 से 9:30 बजे के बीच एक निर्माणाधीन इमारत ढह गई। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में उस समय करीब तीन से चार लोग मौजूद थे। मलबे के नीचे लोगों के दबे होने की आशंका में राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। हादसे की वजह और प्रभावित लोगों की सही संख्या को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
रात में अचानक गूंजी तेज आवाज
स्थानीय निवासी मोहम्मद नईम के मुताबिक, आवाज इतनी तेज थी कि उन्हें पहले लगा कि उनका अपना घर गिर गया है। घर के सभी लोग तुरंत बाहर भागे।

बाहर आकर देखा तो पड़ोस में बन रहा मकान ढह चुका था। नईम का कहना है कि इमारत में तीन से चार लिंटेल (छत की ढलाई) डाले जा चुके थे और वे सब एक साथ नीचे आ गिरे।
कैसी इमारत थी?
एक अन्य स्थानीय निवासी मोहम्मद अल्ताफ ने बताया कि उनका घर गली के ठीक बाहर है, जहां दो से तीन मंजिला नई इमारत बन रही थी।

- निर्माण कार्य करीब तीन से चार महीने से चल रहा था (नईम के अनुसार)
- इमारत दो से तीन मंजिल की थी (अल्ताफ के अनुसार)
- आसपास की दूसरी इमारतों को नुकसान नहीं पहुंचा (अल्ताफ के अनुसार)
राहत और बचाव: मौके पर क्या दिखा?
हादसे के कुछ ही देर बाद मौके पर भीड़ जुट गई। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका के बीच स्थानीय लोग राहत कार्य में जुट गए।
नईम ने बताया कि एक घायल मजदूर ने उन्हें जानकारी दी कि हादसे के वक्त इमारत में तीन से चार लोग थे। उन्होंने खुद मौके पर एक शव को बाहर निकाले जाते हुए देखा। यह प्रत्यक्षदर्शी का बयान है; मृतकों और घायलों की आधिकारिक संख्या पुलिस या प्रशासन की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।
अभी क्या पता नहीं है?
- इमारत गिरने की वजह
- कुल कितने लोग मलबे में फंसे थे और कितने सुरक्षित निकले
- मृतकों और घायलों की आधिकारिक संख्या
- निर्माण की अनुमति और सुरक्षा मानकों की स्थिति
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकेंगे।
आगे क्या?
इलाके के लोगों की नजरें बचाव अभियान पर टिकी हैं। जांच में इमारत की संरचना और निर्माण की गुणवत्ता जैसे पहलू सामने आ सकते हैं, लेकिन फिलहाल इस बारे में कोई आधिकारिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।









