बलौदाबाजार में राम मंदिर की तर्ज पर सजा दुर्गा पंडाल, उमड़ रहे श्रद्धालु

बलौदाबाजार के सिविल लाइन में अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर बना दुर्गा पंडाल नवरात्रि में आकर्षण का केंद्र है। जानें तैयारी, खर्च और खासियत।
नवरात्रि के मौके पर छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में बना दुर्गा पंडाल इन दिनों चर्चा में है। अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर तैयार इस पंडाल को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

पंडाल में मां दुर्गा और मां काली की भव्य प्रतिमाओं के साथ भगवान विष्णु की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। आयोजन समिति के अनुसार इस दुर्गोत्सव पर करीब 25 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
शहर में कई जगह माता की प्रतिमाएं विराजित हैं, लेकिन अपनी बनावट के कारण यह पंडाल श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान बना रहा है।

राम मंदिर की झलक वाला पंडाल क्यों बना आकर्षण?
सिविल लाइन क्षेत्र का यह पंडाल अयोध्या के राम मंदिर की शैली पर बनाया गया है। इसकी बनावट और सजावट देखने के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं।
- पंडाल की थीम अयोध्या के राम मंदिर पर आधारित है
- सजावट और बनावट इसकी सबसे बड़ी खासियत है
- शाम होते ही परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है
- लोग माता के दर्शन के साथ परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं
प्रतिमाओं में क्या है खास?
पंडाल में मां दुर्गा और मां काली की भव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनके साथ भगवान विष्णु की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही है। मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप और मां काली के रौद्र रूप के दर्शन के लिए लोग यहां आ रहे हैं।

पंडाल के बाहर कृष्ण लीला की झांकी
पंडाल के बाहर भगवान कृष्ण की लीलाओं को झांकी के रूप में दिखाया गया है। इससे पंडाल का धार्मिक और सांस्कृतिक आकर्षण और बढ़ गया है।
छह महीने पहले शुरू होती है तैयारी
समिति के अध्यक्ष चितावर जायसवाल के मुताबिक, आयोजन की तैयारी करीब छह महीने पहले से शुरू कर दी जाती है। राम मंदिर की थीम पर पंडाल बनाने और प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने में काफी समय और मेहनत लगती है।
- तैयारी की शुरुआत: लगभग 6 महीने पहले
- अनुमानित खर्च: करीब 25 लाख रुपये
- काम में जुटे: समिति के सदस्य और स्थानीय सहयोगी
सामूहिक सहयोग से बनता है आयोजन
ऐसे बड़े आयोजन में योजना, मेहनत और आपसी तालमेल की अहम भूमिका होती है। पंडाल की सजावट से लेकर प्रतिमा स्थापना तक समिति के सदस्य और स्थानीय लोग मिलकर काम करते हैं। यही वजह है कि यह पंडाल सिर्फ सजावट तक सीमित नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था का केंद्र भी बन गया है।
श्रद्धालुओं के लिए क्या जानना जरूरी?
- पंडाल बलौदाबाजार के सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित है
- शाम के समय भीड़ अधिक रहती है, इसलिए आराम से दर्शन के लिए इसका ध्यान रखें
- दर्शन का समय और अन्य व्यवस्थाओं की आधिकारिक जानकारी आयोजन समिति से ली जा सकती है









