बोर्ड परीक्षा केंद्र की नई व्यवस्था: ग्रामीण छात्रों पर क्या असर?

सत्र 2026-27 से 10वीं-12वीं के ग्रामीण छात्रों को दूसरे स्कूल में बोर्ड परीक्षा देनी पड़ सकती है। शिक्षक संघ ने नई व्यवस्था का विरोध कर पुरानी व्यवस्था मांगी है। (लगभग 155 अक्षर)
छत्तीसगढ़ में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा के केंद्रों को लेकर प्रस्तावित नई व्यवस्था पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश के शिक्षक संघ का कहना है कि इससे ग्रामीण और खासकर अनुसूचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए दूसरे गांव जाना पड़ सकता है। संघ ने पुरानी व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।

रायपुर से मिली जानकारी के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा मंडल की 15 अक्टूबर की वर्चुअल बैठक में जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए। इनके मुताबिक सत्र 2026-27 से छात्र अपने मूल स्कूल के बजाय पास के किसी दूसरे स्कूल में बने केंद्र पर परीक्षा देंगे।
फिलहाल इस मामले में मंडल या सरकार की ओर से कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिक्षक संघ की आपत्तियां उसके अपने पक्ष और दावों पर आधारित हैं।

क्या बदलने जा रहा है?
अब तक यह व्यवस्था सिर्फ शहरी स्कूलों के लिए थी। शहरी छात्र अपने स्कूल की जगह दूसरे स्कूल में परीक्षा देने जाते थे, जबकि ग्रामीण छात्र अपने ही स्कूल में परीक्षा देते रहे हैं।
- पुरानी स्थिति: ग्रामीण छात्र अपने स्कूल में ही परीक्षा देते थे।
- नया निर्देश: सत्र 2026-27 से मूल स्कूल का केंद्र छोड़कर पास के अन्य स्कूल में केंद्र बनाने की व्यवस्था।
- दायरा: नई व्यवस्था लागू हुई तो ग्रामीण छात्र भी इसके दायरे में आएंगे।
ग्रामीण इलाकों में दिक्कत कहां आएगी?
दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आमतौर पर पूरे गांव में एक ही स्कूल होता है। ऐसे में अपने स्कूल में परीक्षा की सुविधा हटने पर छात्रों को दूसरे गांव जाना पड़ेगा।

शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने इस फैसले को अनुसूचित क्षेत्रों के लिए अव्यावहारिक और आपत्तिजनक बताया है। उनके अनुसार पालक सुविधा के लिए बच्चों का दाखिला नजदीकी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल में कराते हैं। परीक्षा केंद्र दूर होने से कुछ छात्रों के परीक्षा से वंचित रह जाने की आशंका है।
आवागमन के साधन और सुरक्षा का सवाल
संघ का कहना है कि अनुसूचित जिलों के कई इलाके वनाच्छादित हैं और वहां जंगली जानवरों का विचरण रहता है। उसके अनुसार:
- शासन ने छात्रों, खासकर बालिकाओं की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए हर 5 किमी पर हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल खोले हैं।
- कई बच्चे आज भी 4-5 पंचायतों से 3-4 किमी पैदल चलकर स्कूल आते हैं।
- नए नियम से मौजूदा केंद्र से नए केंद्र की दूरी 5 से 8 किमी और बढ़ सकती है।
- अनुसूचित क्षेत्रों में आवागमन के साधन बहुत कम हैं।
किस पर पड़ेगा असर?
संघ की चिंता है कि इससे बड़ी संख्या में परीक्षार्थी मुख्य परीक्षा से वंचित हो सकते हैं और छात्र संख्या व शिक्षा के स्तर पर भी असर पड़ेगा। सबसे ज्यादा प्रभावित 10वीं और 12वीं के वे विद्यार्थी हो सकते हैं जो दूरस्थ और वन क्षेत्रों में रहते हैं। इनमें छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया है।
आगे क्या होगा?
शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और अन्य अधिकारियों को पत्र लिखकर नया नियम वापस लेने की मांग की है। अभी तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कोई छूट या वैकल्पिक व्यवस्था दी जाएगी या नहीं। मंडल की ओर से अंतिम फैसले या स्पष्टीकरण का इंतजार है। इससे पहले सभी जिलों में केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।









