सुकमा में सुरक्षित बचपन अभियान: बच्चों को बताए गए पॉक्सो एक्ट और साइबर सुरक्षा के उपाय

सुकमा में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत बच्चों को पॉक्सो एक्ट, गुड टच-बैड टच, बाल विवाह और साइबर अपराधों से बचाव की कानूनी जानकारी दी गई।
छत्तीसगढ़ के सुकमा में बच्चों को शोषण और अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से हुए इस कार्यक्रम में बच्चों को पॉक्सो एक्ट, गुड टच-बैड टच, बाल विवाह और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में बताया गया।

कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य के मार्गदर्शन में हुआ। इसका नेतृत्व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रमेश कुमार चौहान ने किया।
आयोजन का मकसद बच्चों में कानूनी समझ विकसित करना और किसी भी असहज या अनुचित स्थिति में सही मदद लेने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना था।

बच्चों को मिली पॉक्सो एक्ट की जानकारी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रमेश कुमार चौहान ने बच्चों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 (पॉक्सो एक्ट) के अलग-अलग प्रावधानों की जानकारी दी।
उन्होंने बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनी पहलू समझाए। साथ ही यह संदेश दिया कि किसी भी तरह के शोषण या अनुचित व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

गुड टच-बैड टच: असहज लगे तो तुरंत बोलें
कार्यक्रम में बच्चों को गुड टच और बैड टच का फर्क सरल तरीके से समझाया गया। बच्चों को बताया गया कि:
- कोई व्यक्ति गलत तरीके से छूने की कोशिश करे या किसी व्यवहार से असहज महसूस कराए, तो तुरंत विरोध करें।
- ऐसी स्थिति की जानकारी माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जरूर दें।
- किसी भी गलत व्यवहार के लिए बच्चा जिम्मेदार नहीं होता।
वक्ताओं ने साफ किया कि बच्चे की सुरक्षा और सम्मान सबसे ऊपर है।
बाल विवाह के दुष्परिणाम और कानूनी पहलू
बच्चों को बाल विवाह से होने वाले नुकसान भी बताए गए। वक्ताओं के अनुसार, कम उम्र में विवाह से:
- बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है।
- पढ़ाई बाधित होती है।
- बेहतर भविष्य की संभावनाएं कम हो जाती हैं।
बच्चों को यह भी बताया गया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है। अपने आसपास ऐसी कोई घटना होने या किसी पर कम उम्र में शादी का दबाव बनाए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को सूचना देनी चाहिए।
सोशल मीडिया और साइबर अपराध से कैसे बचें?
डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रम का अहम हिस्सा रही। बच्चों को सलाह दी गई कि वे:
- सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क न करें।
- निजी फोटो और वीडियो साझा करने से बचें।
- फर्जी सोशल मीडिया आईडी से सतर्क रहें।
- पासवर्ड और व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
साइबर बुलिंग और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों से कहा गया कि कोई भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि दिखे तो तुरंत अभिभावकों या संबंधित अधिकारियों को बताएं।
बच्चों की सुरक्षा सबकी साझा जिम्मेदारी
वक्ताओं ने कहा कि सुरक्षित माहौल देना सिर्फ प्रशासन या कानून का काम नहीं है। परिवार, विद्यालय और समाज के हर व्यक्ति की इसमें भूमिका है। उनके अनुसार, बच्चों को अधिकारों और कानूनी संरक्षण की जानकारी देकर ही उन्हें शोषण और अपराधों के खिलाफ जागरूक बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में अधिवक्ता कैलाश जैन, अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी उत्कर्ष भारती और RMSA हॉस्टल की वार्डन सैयद सीमा भी विशेष रूप से मौजूद रहीं।









