भारतमाला प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार का साया? सरकारी जमीन को निजी बनाकर मुआवजे के खेल का आरोप

भारतमाला प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार का साया? सरकारी जमीन को निजी बनाकर मुआवजे के खेल का आरोप
भारतमाला प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार का साया? सरकारी जमीन को निजी बनाकर मुआवजे के खेल , देश की प्रतिष्ठित भारतमाला परियोजना पर छत्तीसगढ़ के केशकाल में भ्रष्टाचार और भूमि-हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला बड़ेराजपुर तहसील का है, जहाँ एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहित की जाने वाली सरकारी जमीन को कथित तौर पर एक पटवारी द्वारा निजी खाते में डालकर मुआवजे की सूची में शामिल कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जांच रिपोर्ट आने के कई महीनों बाद भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला: सरकारी जमीन पर निजी कब्जे का आरोप
यह पूरा विवाद केशकाल अनुविभाग के बड़ेराजपुर तहसील के गांव हात्मा से जुड़ा है, जहाँ से भारतमाला एक्सप्रेस-वे गुजरना है। आरोप है कि यहाँ की शासकीय भूमि, जिसका खसरा क्रमांक 10/1 और रकबा 13.144 हेक्टेयर है, में से एक बड़े हिस्से को निजी भूमि में बदल दिया गया। यह भूमि ‘बड़े झाड़ के जंगल’ के रूप में दर्ज थी।भारतमाला प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार का साया? सरकारी जमीन को निजी बनाकर मुआवजे के खेल
पटवारी पर हेराफेरी का गंभीर आरोप, ऐसे हुआ पूरा खेल
आरोपों के केंद्र में पटवारी महावीर हिडको हैं। অভিযোগ है कि उन्होंने अपनी आईडी का उपयोग करके ऑनलाइन रिकॉर्ड में हेरफेर किया। उन्होंने कथित तौर पर एक फर्जी आदेश के जरिए शासकीय भूमि (ख.न. 10/1) का बटांकन कर 1.064 हेक्टेयर का एक नया खसरा (10/260) बनाया और उसे पुनउ और सतनतीन नामक खातेदारों के निजी खाते में डाल दिया। इसके बाद, इसी निजी बनाई गई भूमि में से 0.2442 हेक्टेयर हिस्से को भारतमाला परियोजना के अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित कर दिया गया, ताकि उसका मुआवजा उठाया जा सके।भारतमाला प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार का साया? सरकारी जमीन को निजी बनाकर मुआवजे के खेल
जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई में देरी, उठ रहे सवाल
इस गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब कलेक्टर कार्यालय के आदेश पर एक जांच दल का गठन किया गया। जांच दल ने 13 दिसंबर 2023 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसमें पटवारी द्वारा की गई गड़बड़ी और संबंधित दस्तावेजों का पूरा ब्यौरा दिया गया था। हालांकि, इस रिपोर्ट के सात महीने बीत जाने के बाद भी मामले में कोई परिणामी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।भारतमाला प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार का साया? सरकारी जमीन को निजी बनाकर मुआवजे के खेल
निलंबित पटवारी पर नहीं हुई विभागीय जांच, ऑनलाइन रिकॉर्ड में अब भी गड़बड़ी
आरोपी पटवारी महावीर हिडको को राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर हेरफेर करने और तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर से किसान किताब बांटने जैसे अन्य मामलों में 2023 में ही निलंबित कर दिया गया था। लेकिन इस विशेष भूमि घोटाले के मामले में आज तक न तो कोई विभागीय जांच शुरू की गई है और न ही ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में की गई धोखाधड़ी को सुधारा गया है। इसके चलते आज भी सरकारी पोर्टल पर गलत जानकारी ही प्रदर्शित हो रही है।भारतमाला प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार का साया? सरकारी जमीन को निजी बनाकर मुआवजे के खेल



















