
CG Crime News Mahasamund: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस ने नशा तस्करों के एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस को चकमा देने के लिए तस्करों ने तरबूज की आड़ में गांजे की एक बड़ी खेप छिपा रखी थी। हालांकि, सटीक मुखबिरी के चलते एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और सिंघोड़ा पुलिस ने एनएच-53 पर घेराबंदी कर इस तस्करी को नाकाम कर दिया।
तरबूज की आड़ में छिपा था सवा करोड़ का ‘काला कारोबार’
पुलिस की बड़ी कामयाबी:पुलिस की संयुक्त टीम ने रेहटीखोल के पास एक पिकअप वाहन और एक कार को संदिग्ध अवस्था में रोका। जब पिकअप की तलाशी ली गई, तो ऊपर से तरबूज लदे हुए थे, लेकिन उनके नीचे प्लास्टिक की बोरियों में 2 क्विंटल 25 किलोग्राम गांजा भरा मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस गांजे की कीमत लगभग 1 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है।
फिल्मी अंदाज में ‘पायलटिंग’ कर रहे थे तस्कर
पुलिस की बड़ी कामयाबी:पकड़े गए तस्करों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए एक विशेष योजना बनाई थी। गांजा लदी पिकअप के आगे-आगे एक कार चल रही थी, जो ‘पायलट वाहन’ का काम कर रही थी। कार में सवार लोग पुलिस की लोकेशन और चेकिंग की जानकारी पीछे आ रहे ट्रक को दे रहे थे। यह खेप ओडिशा के संबलपुर से उत्तर प्रदेश के चित्रकूट ले जाई जा रही थी।
यूपी और एमपी के 6 आरोपी गिरफ्तार
इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के रहने वाले 6 आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
सतीश गुप्ता (35) – चित्रकूट, यूपी
घनश्याम गुप्ता (35) – चित्रकूट, यूपी
सूरज गुप्ता (24) – बांदा, यूपी
योगेश कुशवाहा (23) – बांदा, यूपी
हरिबाबू वर्मा (40) – सतना, एमपी (चालक)
रामबाबू वर्मा (48) – सतना, एमपी
पुलिस ने गांजे के साथ तस्करी में प्रयुक्त कार और पिकअप वाहन को भी जब्त कर लिया है।
महासमुंद पुलिस का ‘मिशन क्लीन’: 3 महीने में 16 करोड़ का गांजा जब्त
पुलिस की बड़ी कामयाबी:महासमुंद जिले में नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस का अभियान बेहद आक्रामक रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2024 के शुरुआती तीन महीनों में ही पुलिस ने तस्करों की कमर तोड़ दी है:
कुल प्रकरण: 58 मामले दर्ज
कुल जब्ती: 3347 किलो गांजा बरामद
कुल कीमत: 16.69 करोड़ रुपये
कुल गिरफ्तारियां: 155 आरोपी (जिनमें से 111 बाहरी राज्यों के हैं)
पुलिस की बड़ी कामयाबी:छत्तीसगढ़ पुलिस की इस तत्परता ने साफ कर दिया है कि राज्य के रास्ते होने वाली अवैध तस्करी पर लगाम कसने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। तरबूज वाली यह ट्रिक तस्करों के लिए भारी पड़ गई और अब वे सलाखों के पीछे हैं।



















