छत्तीसगढ़ में 11 सितंबर से बकायादार सरकारी दफ्तरों की बिजली कटेगी, जानें पूरा मामला

छत्तीसगढ़ में बिजली बिल न चुकाने वाले सरकारी विभागों पर सीएसपीडीसीएल की सख्ती, 11 सितंबर से कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू, जानें किन विभागों पर कितना बकाया।
छत्तीसगढ़ में बिजली बिल जमा न करने वाले सरकारी कार्यालयों की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। राज्य की बिजली वितरण कंपनी सीएसपीडीसीएल ने 11 सितंबर से बकायादार सरकारी विभागों के कनेक्शन काटने का फैसला किया है।

रायपुर से इस कार्रवाई की शुरुआत होगी, जहां अकेले सरकारी दफ्तरों पर 100 करोड़ रुपए से अधिक की राशि बकाया बताई जा रही है। इसमें नगर निगम कार्यालयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। कंपनी का कहना है कि लंबे समय से बकाया वसूली की कोशिशें बेअसर रहने के बाद अब सख्त रुख अपनाया जा रहा है।
पूरे प्रदेश में यह बकाया राशि करोड़ों में पहुंच चुकी है, और स्मार्ट मीटर लगने के बावजूद कई विभाग नियमित भुगतान नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि अब कनेक्शन काटने जैसा सख्त कदम उठाया जा रहा है।

पहले दफ्तर, फिर स्कूल और हॉस्टल पर होगी कार्रवाई
सीएसपीडीसीएल की योजना के मुताबिक कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
- सबसे पहले रायपुर के बकायादार सरकारी कार्यालयों के कनेक्शन काटे जाएंगे।
- इसके बाद सरकारी स्कूलों, सरकारी भवनों और हॉस्टलों को इस दायरे में लाया जाएगा।
- कंपनी का मानना है कि सख्ती से ही लंबे समय से टलती आ रही वसूली संभव हो पाएगी।
यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि अब तक सरकारी विभागों को बार-बार नोटिस देने के बावजूद भुगतान में सुस्ती बनी हुई थी।

रायपुर में सबसे ज्यादा बकाया, नगर निगम सबसे आगे
रायपुर जिले के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को साफ दिखाते हैं।
- रायपुर के सरकारी कार्यालयों पर करीब 100 करोड़ रुपए से ज्यादा बिजली बिल बकाया है।
- इसमें अकेले नगर निगम कार्यालयों का हिस्सा लगभग 80 करोड़ रुपए है।
- यही वजह है कि वसूली अभियान की शुरुआत भी रायपुर से की जा रही है।
प्री-पेड सिस्टम की तैयारी में क्यों हो रही देरी?
सीएसपीडीसीएल पिछले मार्च महीने से सरकारी कार्यालयों में प्री-पेड बिजली व्यवस्था लागू करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह योजना अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।
- मोबाइल रिचार्ज की तरह, सरकारी विभागों को अब तीन महीने की अनुमानित राशि पहले ही जमा करनी होगी।
- पुराना बकाया भुगतान न होने और एडवांस राशि जमा न करने के कारण प्री-पेड सिस्टम की शुरुआत में देरी हो रही है।
- यही कारण है कि कंपनी अब सीधे कनेक्शन काटने का रास्ता अपना रही है, ताकि दबाव बनाकर भुगतान कराया जा सके।
स्मार्ट मीटर पूरी तरह लग चुके, फिर भी वसूली अटकी
प्रदेश के सभी विकासखंड स्तर के सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम पहले ही पूरा हो चुका है। इसके बावजूद बकाया राशि में कमी नहीं आई है।
- स्मार्ट मीटर लगने के बाद कंपनी को उम्मीद थी कि उपयोग और भुगतान की निगरानी आसान होगी।
- लेकिन विभागों की तरफ से नियमित भुगतान न होने से बकाया लगातार बढ़ता गया।
- अब कंपनी ने तय किया है कि सालभर के भीतर पुराना बकाया चार किश्तों में वसूला जाएगा।
प्रदेशभर में 3200 करोड़ रुपए का बकाया, कौन-कौन आगे?
मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के 32 सरकारी विभागों पर सीएसपीडीसीएल का करीब 3200 करोड़ रुपए बिजली बिल बकाया है। रिपोर्टों के अनुसार यह आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है।
- नगरीय निकायों पर सबसे ज्यादा करीब 1596.36 करोड़ रुपए बकाया है।
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर लगभग 1121.36 करोड़ रुपए का भुगतान लंबित है।
- शेष राशि अन्य सरकारी विभागों और कार्यालयों पर बकाया बताई जा रही है।
किस पर पड़ेगा असर, आगे क्या होगा?
अगर तय समयसीमा के भीतर बकाया राशि जमा नहीं की जाती, तो संबंधित सरकारी दफ्तरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिसका सीधा असर वहां होने वाले रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ सकता है। स्कूल और हॉस्टल जैसी जगहों पर बिजली कटौती से आम लोगों और बच्चों को असुविधा हो सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बकायादार विभाग समय रहते भुगतान करते हैं या फिर सीएसपीडीसीएल को वाकई कनेक्शन काटने जैसा कदम उठाना पड़ता है। कंपनी की मंशा साफ है कि लंबित बकाया समय पर वसूला जाए और भविष्य में प्री-पेड व्यवस्था के जरिए ऐसी स्थिति दोबारा न बने।









