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Chhattisgarh High Court Decision: ‘अवैध संबंध’ मात्र आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं, हाईकोर्ट ने पति और उसकी मित्र को किया बरी

CG High Court News: Chhattisgarh High Court Decision: ‘अवैध संबंध’ मात्र आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं, हाईकोर्ट ने पति और उसकी मित्र को किया बरी, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने ‘आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण’ (धारा 306 आईपीसी) के एक मामले में कानून की महत्वपूर्ण व्याख्या की है। माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी पति के किसी अन्य महिला के साथ अवैध संबंध हैं, तो केवल इस आधार पर उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सजा के लिए ठोस सबूत, प्रत्यक्ष उकसावा और गंभीर मानसिक प्रताड़ना का होना अनिवार्य है।

ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार

Chhattisgarh High Court Decision: ‘न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल की एकलपीठ ने महासमुंद अपर सत्र न्यायालय द्वारा जुलाई 2022 में दिए गए फैसले को सही ठहराया है। इससे पहले, निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में पति और उसकी महिला मित्र को दोषमुक्त कर दिया था। पीड़ित पक्ष ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।

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क्या था पूरा मामला?

Chhattisgarh High Court Decision: ‘मिली जानकारी के अनुसार, मृतका कुंती का विवाह वर्ष 2011 में रवि कुमार गायकवाड के साथ हुआ था। शादी के कुछ वर्षों बाद, संतान सुख की कमी, कम दहेज और अशिक्षा जैसे कारणों को लेकर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए। साथ ही, यह भी आरोप लगा कि पति के किसी अन्य महिला के साथ संबंध थे। जून 2017 में कुंती की दुखद मृत्यु हो गई, जिसके बाद पुलिस ने पति और उसकी कथित महिला मित्र के विरुद्ध धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया था।

डायरी नोट और साक्ष्यों का विश्लेषण

Chhattisgarh High Court Decision: ‘मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने मृतका द्वारा लिखा गया एक डायरी नोट भी प्रस्तुत किया गया। हाईकोर्ट ने नोट का अवलोकन करते हुए कहा:

  • नोट से पता चलता है कि मृतका अपने पति से प्रेम करती थी और उसकी महिला मित्र से खफा थी।

  • लेकिन, डायरी में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं था कि आरोपियों ने उसे आत्महत्या के लिए सीधे तौर पर उकसाया या विवश किया।

  • न्यायालय ने माना कि अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत हो सकते हैं, लेकिन जब तक उनका आत्महत्या की घटना से सीधा लिंक (Causal Link) साबित न हो, तब तक यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

कानूनी दृष्टि: धारा 306 के लिए क्या है जरूरी?

Chhattisgarh High Court Decision: ‘उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में जोर दिया कि धारा 306 आईपीसी के तहत सजा देने के लिए अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होता है कि आरोपी ने मृतक को मानसिक या शारीरिक रूप से इस हद तक प्रताड़ित किया कि उसके पास जीवन समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प न बचा हो। केवल संदेह या अनैतिक संबंधों के आधार पर किसी को अपराधी नहीं माना जा सकता।

Pooja Chandrakar

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