छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य बार काउंसिल की निष्क्रियता पर लिया स्वतः संज्ञान, मांगा जवाब

4 साल से बिना निर्वाचित निकाय के काम कर रहा राज्य बार काउंसिल
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य बार काउंसिल की निष्क्रियता पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (WPPIL संख्या 25/2025) दर्ज की है। 2 फरवरी 2021 से निर्वाचित निकाय के अभाव में काउंसिल के प्रशासनिक कार्य ठप पड़े हैं, जिससे अधिवक्ताओं और कानून व्यवस्था से जुड़े कई अहम कार्य प्रभावित हो रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस मामले में जवाब मांगते हुए जल्द सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य बार काउंसिल की निष्क्रियता पर लिया स्वतः संज्ञान, मांगा जवाब
4 साल से लंबित हैं अहम वैधानिक कार्य
राज्य बार काउंसिल की निष्क्रियता के कारण कई आवश्यक कार्य ठप्प हो चुके हैं, जिनमें शामिल हैं:
✅ नए अधिवक्ताओं का प्रवेश और अधिवक्ता रोल का रखरखाव
✅ व्यावसायिक आचरण और कदाचार की जांच
✅ अधिवक्ताओं के अधिकारों और कल्याण योजनाओं का संरक्षण
✅ कानूनी सुधारों, शोध पत्रिकाओं और सेमिनारों का आयोजन
✅ कानूनी सहायता कार्यक्रमों की निगरानी
✅ चुनावी प्रक्रिया और विधि पुस्तकालयों का प्रबंधन
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की भूमिका पर सवाल
मामले की सुनवाई 6 फरवरी 2025 को हुई, जिसमें हाईकोर्ट ने पूछा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा राज्य बार काउंसिल की निष्क्रियता को दूर करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। काउंसिल के वकील पलाश तिवारी ने स्वीकार किया कि 2021 के बाद से चुनाव नहीं हुए हैं और इसका कारण “सत्यापन नियमों में विफलता” बताया।
हालांकि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्थिति सुधारने के लिए एक विशेष समिति गठित की थी, लेकिन अब तक चुनाव कराने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से पेश हुए वकील शिवांग दुबे ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य बार काउंसिल की निष्क्रियता पर लिया स्वतः संज्ञान, मांगा जवाब
हाईकोर्ट का सख्त रुख, जल्द उठाने होंगे सुधारात्मक कदम
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिल को 12 फरवरी 2025 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया जल्द शुरू करने और काउंसिल के प्रशासन को फिर से सक्रिय करने के लिए त्वरित कदम उठाने पर जोर दिया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य बार काउंसिल की निष्क्रियता पर लिया स्वतः संज्ञान, मांगा जवाब
फैसले से मिले मुख्य संकेत
? 4 साल से चुनावों में देरी के लिए “सत्यापन नियमों की विफलता” का बहाना अस्वीकार्य है।
? बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने चुनाव कराने में अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।
? हाईकोर्ट का हस्तक्षेप कानूनी संस्थानों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
? भविष्य में ऐसी प्रशासनिक विफलताओं को रोकने के लिए चुनावी सुधारों की सख्त जरूरत है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य बार काउंसिल की निष्क्रियता पर लिया स्वतः संज्ञान, मांगा जवाब



















