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देसूरी: अवैध लकड़ी कटाई और कोयला निर्माण, प्रशासन की नजर में ठेकेदार का अनैतिक कृत्य

देसूरी: अवैध लकड़ी कटाई और कोयला निर्माण, प्रशासन की नजर में ठेकेदार का अनैतिक कृत्य

आबिद मोहम्मद/राजस्थान:- 

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राजस्थान। देसूरी ग्राम पंचायत में अवैध लकड़ी कटाई का मामला एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जहां ठेकेदार द्वारा नियमों की अवहेलना करते हुए ‘युवा मामला एवं खेल विभाग जयपुर’ की 3.2000 हेक्टेयर भूमि पर अवैध रूप से लकड़ी काटकर कोयला बनाया जा रहा है। यह कृत्य न केवल गोचर भूमि पर हो रहा है बल्कि अन्य सरकारी विभागों की आरक्षित भूमि पर भी ठेकेदार ने अपने अवैध कार्यों का प्रसार कर दिया है।

देसूरी: अवैध लकड़ी कटाई और कोयला निर्माण, प्रशासन की नजर में ठेकेदार का अनैतिक कृत्य

नीलामी के नियमों का उल्लंघन

ग्राम पंचायत देसूरी ने 24 फरवरी 2023 को गोचर भूमि में खड़ी अंग्रेजी बबुल की झाड़ियों की खुली नीलामी की थी। ठेकेदार को नीलामी के शर्तों के अनुसार एक वर्ष की अवधि दी गई थी, लेकिन ठेकेदार ने 6 महीने अतिरिक्त कार्य किया और अब भी नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध कटाई कर रहा है।

अवैध रूप से लकड़ी का कोयला निर्माण

देसूरी: अवैध लकड़ी कटाई और कोयला निर्माण, प्रशासन की नजर में ठेकेदार का अनैतिक कृत्य

ठेकेदार ने ‘युवा मामला एवं खेल विभाग’ की भूमि पर लाखों की लकड़ी काटकर उसे जलाकर कोयले में बदल दिया। यह कार्य खुलेआम चल रहा है, जबकि प्रशासन इस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। यह कृत्य स्वामी विवेकानंद राजकीय विद्यालय के पास हुआ, जहां पढ़ाई कर रहे छात्रों की सेहत पर धुएं का गंभीर असर पड़ा है।

उपजाऊ भूमि की गुणवत्ता का ह्रास

जहां पर ठेकेदार द्वारा लकड़ी जलाकर कोयला बनाया गया, वहां की भूमि की उपजाऊ क्षमता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। इस भूमि पर पशुओं के लिए घास उगने की संभावना कई वर्षों तक नहीं रहेगी। इससे गोचर भूमि के उपयोगिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।

अन्य सरकारी विभागों की भूमि पर भी अवैध कब्जा

देसूरी: अवैध लकड़ी कटाई और कोयला निर्माण, प्रशासन की नजर में ठेकेदार का अनैतिक कृत्य

ठेकेदार ने अभियोजन, सामाजिक न्याय, पंजीयन, चिकित्सा और अन्य विभागों की आरक्षित भूमि से भी लकड़ी काटकर अवैध रूप से कोयला बनाया। इसमें लाखों रुपए की लकड़ी का अवैध उपयोग किया गया है, जिससे सरकारी संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है।

प्रशासन की संभावित कार्यवाही

अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इस अवैध गतिविधि पर कोई ठोस कार्यवाही करेगा या यह मामला यूं ही दबा रहेगा। ठेकेदार द्वारा सरकारी और न्यायिक विभागों की भूमि पर भी नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ क्षमता नष्ट हो चुकी है।

 

Nidar Chhattisgarh Desk

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