धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदने के 5 तरीके: फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ETF-म्यूचुअल फंड, डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और EGR। जानें खर्च, जोखिम और शर्तें।

धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा है। अब यह खरीदारी सिर्फ गहनों, सिक्कों या बिस्किट तक सीमित नहीं है। गोल्ड ETF, गोल्ड म्यूचुअल फंड, डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) जैसे विकल्प भी मौजूद हैं।
सही विकल्प चुनने से पहले अपना मकसद तय करना जरूरी है। पहनने या परिवार को सौंपने के लिए गहने ठीक हो सकते हैं, लेकिन निवेश का लक्ष्य हो तो मेकिंग चार्ज, टैक्स, खरीद-बिक्री की सुविधा और जोखिम भी देखने होंगे।

फिजिकल गोल्ड: गहने, सिक्के और बिस्किट
धनतेरस पर ज्यादातर लोग गहने खरीदते हैं। इन्हें पहना जा सकता है और अगली पीढ़ी को भी सौंपा जा सकता है। निवेश के नजरिये से कुछ बातें ध्यान रखनी चाहिए:
- गहनों की कीमत में सोने के भाव के साथ मेकिंग चार्ज और GST जुड़ता है
- बेचते समय मेकिंग चार्ज की पूरी रकम वापस मिलना जरूरी नहीं, इसलिए वास्तविक मुनाफा घट सकता है
- सिर्फ निवेश करना हो तो सिक्के या गोल्ड बार देखे जा सकते हैं
- खरीदते समय शुद्धता, हॉलमार्क, बिल और खरीद-बिक्री की शर्तें जरूर जांचें
गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड
जो लोग सोना घर में रखे बिना बाजार के जरिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए ये दो विकल्प हैं।

गोल्ड ETF: इनकी कीमत सोने के भाव से जुड़ी होती है और ये आमतौर पर फिजिकल गोल्ड में निवेश करते हैं। इनके यूनिट शेयर बाजार में खरीदे-बेचे जाते हैं। इसके लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट चाहिए।
गोल्ड म्यूचुअल फंड: ये आमतौर पर गोल्ड ETF में निवेश करते हैं। इनमें म्यूचुअल फंड कंपनी या निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए पैसा लगाया जा सकता है और अलग से डीमैट अकाउंट जरूरी नहीं होता।

दोनों में सोने की कीमत के उतार-चढ़ाव का फायदा या नुकसान निवेशक को मिल सकता है, पर लॉकर या सुरक्षित जगह की जरूरत नहीं पड़ती। निवेश से पहले फंड के खर्च और टैक्स की जानकारी जरूर लें।
डिजिटल गोल्ड: मोबाइल से छोटी रकम में निवेश
डिजिटल गोल्ड में मोबाइल के जरिए छोटी रकम से भी सोना खरीदा जा सकता है। कुछ पेमेंट ऐप 1 रुपये जैसी राशि से निवेश की सुविधा देते हैं, हालांकि न्यूनतम रकम प्लेटफॉर्म पर निर्भर करती है। सेवा देने वाली कंपनी बराबर मात्रा में फिजिकल गोल्ड रखने का दावा करती है।
सावधानी की बात यह है कि डिजिटल गोल्ड भारतीय रिजर्व बैंक या सेबी के नियमित निवेश उत्पादों की तरह रेगुलेटेड नहीं है। इसलिए कंपनी की विश्वसनीयता, सोने की सुरक्षा और पैसे निकालने की शर्तें पहले समझ लें।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: अब नई खरीद बंद
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) भारत सरकार की ओर से रिजर्व बैंक जारी करता है। इनकी कीमत सोने के वजन के आधार पर तय होती है, इसलिए घर में सोना रखने की जरूरत नहीं पड़ती। निर्धारित शर्तों के तहत इनमें ब्याज का प्रावधान भी रहा है।
अहम बात यह है कि आरबीआई ने फिलहाल नए SGB जारी करना बंद कर रखा है। इच्छुक लोग उपलब्धता के आधार पर शेयर बाजार के सेकेंडरी मार्केट से इन्हें खरीद सकते हैं। खरीदने से पहले मैच्योरिटी, बाजार भाव, लिक्विडिटी और टैक्स नियम समझना जरूरी है।
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR)
EGR के जरिए निवेशक सोना पास रखे बिना इलेक्ट्रॉनिक रूप में उसकी हिस्सेदारी रख सकते हैं। ये सोने से जुड़ी, एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाली सिक्योरिटीज हैं और शेयर बाजार के जरिए खरीदी-बेची जा सकती हैं। इनकी कीमत सोने के मूल्य के साथ बाजार में मांग और आपूर्ति से भी प्रभावित हो सकती है।
लागू नियमों के तहत EGR को फिजिकल गोल्ड में बदलने की सुविधा भी मिल सकती है, पर इसके लिए तय मात्रा, शुद्धता, डिलीवरी और शुल्क से जुड़ी शर्तें लागू हो सकती हैं। निवेश से पहले एक्सचेंज के नियम और डिलीवरी का खर्च जान लें।
कौन सा विकल्प किसके लिए
- पहनने और परंपरा के लिए: गहने
- सिर्फ निवेश के लिए भौतिक सोना: सिक्के या गोल्ड बार
- घर में रखे बिना बाजार से निवेश: गोल्ड ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड
- छोटी रकम से शुरुआत: डिजिटल गोल्ड, पर रेगुलेशन की कमी का ध्यान रखें
- सेकेंडरी मार्केट से खरीद: SGB और EGR









