तूता जंगल में पेड़ कटाई का विरोध तेज, फिल्म सिटी के लिए दूसरी जगह की मांग

नवा रायपुर के माना-तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए पेड़ कटाई का विरोध बढ़ा। संघर्ष समिति ने स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर कटाई रोकने की मांग की है।
नवा रायपुर के माना-तूता में प्रस्तावित चित्रोत्पला फिल्म सिटी के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध तेज हो रहा है। माना-तूता जंगल संघर्ष समिति ने आंदोलन आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है और 28 अक्टूबर को भाजपा की छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर कटाई पर तत्काल रोक की मांग की है।

समिति का कहना है कि वह विकास या फिल्म सिटी के खिलाफ नहीं है, बल्कि जंगल काटकर परियोजना बनाने का विरोध कर रही है। उसकी मांग है कि फिल्म सिटी के लिए नवा रायपुर में कोई दूसरी जगह चुनी जाए।
पुलिस के अनुसार या प्रशासन की ओर से कटाई को लेकर अलग से कोई पक्ष इस जानकारी में शामिल नहीं है, इसलिए यह रिपोर्ट मुख्य रूप से समिति और ग्रामीणों के दावों पर आधारित है।

संघर्ष समिति की क्या हैं मांगें?
नवा रायपुर सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष सुजीत कुमार घिदौड़े ने कहा कि किसी भी कीमत पर पेड़ों की कटाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके मुताबिक सरकार को पेड़ लगाने और ऑक्सीजन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, और आने वाले दिनों में आंदोलन तेज किया जाएगा।
समिति की प्रमुख मांगें:

- पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक
- फिल्म सिटी के लिए नवा रायपुर में वैकल्पिक जगह का चयन
- जंगल के बीच खाली जमीन पर पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और पर्यावरण शिक्षा सुविधाएं विकसित करना
पत्र में क्या लिखा गया?
समिति ने पत्र में बताया है कि माना-तूता का मानव निर्मित जंगल रायपुर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। दशकों की मेहनत से बंजर और पथरीली जमीन पर तैयार हुआ यह जंगल जैव विविधता और पर्यावरण के लिहाज से अहम बताया गया है। समिति इसे राजधानी क्षेत्र के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच मानती है।
समिति का दावा है कि नवा रायपुर में फिल्म सिटी के लिए सैकड़ों एकड़ खाली जमीन दूसरी जगह उपलब्ध है। पत्र में प्रधानमंत्री की ‘एक पेड़ मां के नाम’ मुहिम का जिक्र करते हुए कहा गया कि एक ओर पेड़ लगाने की बात हो रही है, दूसरी ओर हजारों पेड़ कटने की आशंका है। समिति ने स्मृति ईरानी से हस्तक्षेप की अपील की है।
27 अक्टूबर से दोबारा शुरू हुई कटाई
माना-तूता में 27 अक्टूबर से पेड़ों की कटाई दोबारा शुरू होने की जानकारी है। खबर मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पेड़ों से लिपटकर कटाई रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस से उनकी झूमाझटकी हुई।
- पुलिस 10 ग्रामीणों को माना थाने ले गई।
- कांग्रेस के शहर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता थाने पहुंचे और घेराव किया।
- करीब एक घंटे बाद ग्रामीणों को छोड़ दिया गया।
कितना बड़ा है प्रोजेक्ट और कितने पुराने हैं पेड़?
ग्रामीणों के अनुसार जंगल के कई पेड़ 30 से 40 साल पुराने हैं। फिल्म सिटी के लिए करीब 100 एकड़ क्षेत्र में निर्माण प्रस्तावित है, इसलिए ग्रामीणों को बड़ी संख्या में पेड़ कटने की आशंका है। कितने पेड़ काटे जाएंगे, इसका आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
2 अक्टूबर को हुआ था पौधरोपण
इसी परिसर में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों-कर्मचारियों ने करीब 1,000 पौधे लगाए थे। तब छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा था कि फिल्म सिटी को आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण के अनुकूल विकसित किया जाएगा। उन्होंने अधिक हरित क्षेत्र विकसित करने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल की बात भी कही थी।
कटाई शुरू होने के बाद से संघर्ष समिति और कांग्रेस इसका विरोध कर रही हैं।
आगे क्या?
समिति ने आंदोलन तेज करने की बात कही है, लेकिन इसकी रूपरेखा अभी सामने नहीं आई है। कटाई पर रोक या वैकल्पिक जगह को लेकर सरकार या टूरिज्म बोर्ड की ओर से ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है।









