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राजनांदगांव

महापौर पर सत्ता का सुख भोगने का आरोप, निर्दलीय पार्षदों की नाराजगी पर पूर्व पार्षद ओस्तवाल ने जताई चिंता

Rajnandgaon News:महापौर पर सत्ता का सुख भोगने का आरोप, निर्दलीय पार्षदों की नाराजगी पर पूर्व पार्षद ओस्तवाल ने जताई चिंता

राजनांदगांव | Rajnandgaon News: शहर की जन-जन की आवाज और पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने महापौर हेमा देशमुख के खिलाफ एक कड़ा पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने निगम की महापौर पर सत्ता का सुख भोगने का आरोप लगाया और निर्दलीय पार्षदों की अनदेखी करने पर गंभीर चिंता जताई।

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एमआईसी सदस्य का इस्तीफा और महापौर की तानाशाही

ओस्तवाल ने महापौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि एक निर्दलीय पार्षद द्वारा एमआईसी सदस्य पद से इस्तीफा देने की वजह महापौर की तानाशाही है, जो कांग्रेस पार्टी और शहर की राजनीति के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में, जब निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से कांग्रेस का महापौर राजनांदगांव नगर निगम में बनाया गया था, तो महापौर ने साढ़े चार वर्षों तक सत्ता का आनंद लिया, लेकिन पार्षदों की समस्याओं और शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया।

कांग्रेस पार्टी के लिए गंभीर चिंता

ओस्तवाल ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं, जैसे कि प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, और छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट से आग्रह किया कि वे राजनांदगांव में हो रही इन घटनाओं का संज्ञान लें। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महापौर हेमा देशमुख के तानाशाही रवैये के कारण आगामी नगरीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ओस्तवाल ने चेतावनी दी कि यदि पार्टी निर्दलीय पार्षदों की अनदेखी करती है, तो इसका परिणाम चुनाव में प्रतिकूल हो सकता है।

राजनांदगांव की राजनीति में बदलाव की आवश्यकता

Rajnandgaon News:महापौर पर सत्ता का सुख भोगने का आरोप, निर्दलीय पार्षदों की नाराजगी पर पूर्व पार्षद ओस्तवाल ने जताई चिंता

ओस्तवाल ने अपने पत्र में इस बात का उल्लेख किया कि राजनांदगांव में कांग्रेस को पूर्व में कई चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है, और ऐसे में पार्टी को एक ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है। उन्होंने महापौर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और निर्दलीय पार्षदों के महत्व को नजरअंदाज न करने की सलाह दी।

राजनांदगांव की राजनीति में इस घटनाक्रम ने एक नया मोड़ ले लिया है, जिसमें महापौर के खिलाफ उठ रही आवाजें और निर्दलीय पार्षदों की नाराजगी प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं। कांग्रेस पार्टी को इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाने की जरूरत है।

Nidar Chhattisgarh Desk

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